
नेशनल डेस्क। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की एक रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु में बीबीएमपी की सड़कें स्टेट और नेशनल हाईवे की तुलना में प्रति किमी औसतन 19-20 खतरनाक गड्डे हैं, जो इन सड़कों पर चलने वालों के लिए ठीक नहीं है। रिपोर्ट ने राज्य के राजमार्गों पर 8.87, प्रमुख जिला सड़कों पर 8.43 और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 7.39 प्रति किमी खतरों की ओर इशारा किया। रिपोर्ट के अनुसार सैंपल सड़कों के ज्वाइंट इंस्पेक्शंस से पता चला है कि बीबीएमपी सड़कें राज्य की किसी भी अन्य प्रमुख सड़कों की तुलना में अधिक खतरनाक हैं। सड़क प्रबंधन एजेंसियां भी ब्लैक स्पॉट की समय पर पहचान और सुधार करने में विफल रही हैं, जहां बार-बार और घातक दुर्घटनाएं होती हैं।
कोविड लॉकडाउन में कम हुई दुर्घनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा नीति, 2015 में निर्धारित लक्ष्य को महसूस नहीं किया गया क्योंकि 2015 में 17.32 फीसदी की तुलना में 2020 में सड़क दुर्घटनाओं में 30 फीसदी घातक दुर्घटनाएं हुईं, हालांकि मृत्यु दर में 22.24 फीसदी की गिरावट आई है, 2015 में 10,856 थी वो 2020 में 9,760 हो रह गई। राज्य में कोविड-19 प्रेरित लॉकडाउन के कारण 2020 में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई है। कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण के कामकाज पर हुए ऑडिट पर कैग की रिपोर्ट, जिसे बुधवार को विधानसभा में पेश किया गया था, में 2015 में दुर्घटनाएं 44,011 से घटकर 2020 में 34,178 रह गई।
घायल लोगों की संख्या में गिरावट
सरकार ने 2015 में कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा नीति और कर्नाटक राज्य सड़क सुरक्षा प्राधिकरण अधिनियम, 2017 को विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रयास के माध्यम से 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर को क्रमश: 25 फीसदी और 30 फीसदी तक कम करने के उद्देश्य से लाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि घायल लोगों की संख्या 2015 में 56,971 से घटकर 2020 में 39,492 हो गई।
नियम नहीं बने
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि केएसआरएसए के कार्यों को करने के लिए आवश्यक नियम अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए अक्टूबर 2021 तक तैयार नहीं किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहनों को ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाण पत्र बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए जारी किए गए क्योंकि मोटर वाहनों के निरीक्षक के कैडर में काफी पद खाली पड़े हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 22 जिलों में ट्रॉमा केयर सेंटर (टीसीसी) की स्थापना के लिए कोई कार्य योजना तैयार नहीं की। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटना पीडि़तों को 90,000 मामलों में समय पर मेडिकल केयर नहीं मिली है।
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