
मुजफ्फरपुर. देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग के मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाले रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम और अपर्णा सेन समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ गुरूवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले दायर की गई एक याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्य कांत तिवारी के आदेश के बाद यह प्राथमिकी दर्ज हुई है।
ओझा ने कहा कि सीजेएम ने 20 अगस्त को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी। इसके बाद गुरूवार को सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हुई। ओझा का आरोप है कि इन हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गयी है। इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं।
क्या लिखा था पत्र में...
पीएम को भेजे गए इस पत्र में लिखा था, ''अफसोस की बात है कि 'जय श्री राम' आज भड़काऊ बन गया है। भारत के बहुसंख्यक समुदाय में राम का नाम पवित्र हैं। एक जनवरी 2009 से 29 अक्टूबर 2018 के बीच 254 धार्मिक पहचान आधारित हिंसा दर्ज की गईं। जबकि 2016 में दलितों पर अत्याचार के 840 मामले सामने आए हैं। प्रिय प्रधानमंत्री, अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?"
इन लोगों ने लिखा था पत्र
रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम और अपर्णा सेन के अलावा पत्र लिखने वालों में अनुराग कश्यप, अदूर गोपालकृष्णन, बिनायक सेन, सौमित्रो चटर्जी, कोंकणा सेन शर्मा, रेवती, श्याम बेनेगल, शुभा मुद्गल, रूपम इस्लाम, अनुपम रॉय, परमब्रता, रिद्धि सेन भी शामिल हैं।
यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है...
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