रहस्य या शरारत? क्या शताब्दी एक्सप्रेस पर हुआ पथराव महज़ शरारत था या किसी बड़ी साजिश का संकेत? RSS प्रमुख Mohan Bhagwat की मौजूदगी के बीच आखिर निशाने पर कौन था? CCTV फुटेज में क्या कैद हुआ, और अज्ञात हमलावर कौन है? खिड़की का शीशा टूटने के बाद भी क्या रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं? सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं।
फिरोजाबाद/आगरा: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाली खबर सामने आ रही है। दिल्ली-लखनऊ रूट पर दौड़ने वाली देश की सबसे वीआईपी ट्रेनों में से एक, शताब्दी एक्सप्रेस को अचानक निशाना बनाया गया है। इस हाई-प्रोफाइल ट्रेन पर पथराव की इस खौफनाक घटना ने न सिर्फ रेलवे प्रशासन बल्कि देश की खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस ट्रेन की बोगी में कोई साधारण शख्स नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत खुद सवार थे।


शाम के 7:45 बजे... और अचानक गूंजी शीशा टूटने की आवाज!
वक्त था गुरुवार की शाम करीब 7:45 बजे का। लखनऊ से नई दिल्ली की तरफ जा रही डाउन शताब्दी एक्सप्रेस (12003 UP) अपनी पूरी रफ्तार से इटावा-टुंडला रेल सेक्शन को पार कर रही थी। ट्रेन जैसे ही फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के नजदीक पेमेश्वर गेट ब्रिज के पास पहुंची, तभी अंधेरे का फायदा उठाकर एक अज्ञात हमलावर ने ट्रेन को निशाना बनाया। सन्नाटे को चीरती हुई ट्रेन की रफ्तार के बीच अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। ट्रेन के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले एक्जीक्यूटिव क्लास के E1 कोच पर एक भारी पत्थर आकर टकराया। पत्थर इतनी रफ्तार और ताकत से मारा गया था कि खिड़की का मजबूत शीशा चकनाचूर हो गया। ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों के लिए यह पल किसी खौफनाक बुरे सपने जैसा था। बोगी के अंदर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही सेकंडों में पूरी ट्रेन में दहशत फैल गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि चलती ट्रेन पर यह अचानक हुआ हमला कोई सामान्य शरारत थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी थी।

E1 बोगी में हलचल: जब सुरक्षाकर्मियों के उड़ गए होश
जैसे ही पत्थर खिड़की से टकराया, वैसे ही ट्रेन में तैनात स्पेशल सिक्योरिटी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के हाथ-पांव फूल गए। सस्पेंस और डर का माहौल इसलिए और गहरा गया क्योंकि इसी E1 कोच में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सफर कर रहे थे। देश की सबसे सुरक्षित शख्सियतों में शुमार मोहन भागवत की मौजूदगी के कारण इस पथराव ने तुरंत एक बड़ा राजनैतिक और सुरक्षात्मक मोड़ ले लिया। कंट्रोल रूम को जैसे ही सूचना मिली कि मोहन भागवत की बोगी पर हमला हुआ है, वैसे ही आगरा से लेकर लखनऊ तक के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। हालांकि, इस पूरे वाकये में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इतनी भीषण टक्कर के बाद भी बोगी में सवार आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और अन्य सभी सह-यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस हमले में किसी भी यात्री को कोई शारीरिक चोट नहीं आई और ट्रेन को बिना रोके आगे के लिए रवाना कर दिया गया।

आधी रात को छानबीन: साजिश या शरारत? तलाश में जुटी खाकी
घटना के कुछ ही मिनटों के भीतर फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक (SP) आदित्य लांघे, आगरा रेलवे के SP अनिल झा और SP (सिटी) रवि शंकर प्रसाद भारी पुलिस बल के साथ पेमेश्वर गेट ब्रिज और रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। रात के अंधेरे में ही रेलवे ट्रैक और आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया। जांच अधिकारी का कहना है कि "हम मामले की हर एक एंगल से जांच कर रहे हैं। यह पता लगाना हमारी प्राथमिकता है कि हमलावर को ट्रेन में वीआईपी मूवमेंट की जानकारी पहले से थी या यह सिर्फ किसी अराजक तत्व की औचक हरकत है।"

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
अब पुलिस और खुफिया विभाग की टीमें इस रहस्यमयी हमले के पीछे के चेहरे को बेनकाब करने में जुट गई हैं। रेलवे स्टेशनों, पटरियों के आसपास के संवेदनशील इलाकों और पेमेश्वर गेट के पास लगे सभी CCTV कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है। सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस को एक्टिव कर दिया गया है। देश की इतनी बड़ी शख्सियत की सुरक्षा में लगी यह सेंध क्या किसी गहरी साजिश का हिस्सा है? इस सवाल का जवाब अब पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के खुलासे के बाद ही सामने आ पाएगा। तब तक इलाके में तनाव और सस्पेंस का माहौल बना हुआ है।


