
नई दिल्ली. उप राष्ट्रपति एम. वैंकेया नायडु और संघ प्रमुख मोहन भागवत के अकाउंट से ब्लू टिक हटाने के कारण विवादों में आए ट्विटर को लेकर सरकार कड़े एक्शन के मूड में आ गई है। सोशल मीडिया गाइडलाइन के पालन करने में आनाकानी कर रहे Twitter को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय (IT मिनिस्ट्री) ने शनिवार को फाइनल नोटिस जारी किया है। इसमें साफ कहा गया है कि वो तुरंत आईटी की नियमों का पालन करे, अन्यथा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि सबको हमारे कानूनों का पालन करना होगा।
Twitter की कार्यशैली से नाराज है सरकार
केंद्र सरकार ट्विटर की कार्यशैली से लंबे समय से नाराज चल रही है। फाइनल नोटिस में दो टूक कहा गया है कि अगर उसने नियमों का पालन नहीं किया, तो उसके खिलाफ आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत उपलब्ध देयता से छूट वापस ले ली जाएगी। इसके बाद ट्विटर आईटी अधिनियम और भारत के अन्य दंड कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। माना जा रहा है कि अगर ट्विटर अब भी अड़ा रहा, तो भारत से उसका बोरिया-बिस्तरा तक उठ सकता है। नोटिस में कहा गया है कि भारत एक सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। उसने ट्विटर को खुले हाथों से स्वीकार किया। इन 10 सालों में ट्विटर ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं बना सका, जिससे यूजर्स की शिकायतों को सुलझाया जा सके। नोटिस में ट्विटर प्लेटफॉर्म पर बढ़ते अपशब्दों और यौन दुराचार जैसे मामलों का भी हवाला दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट कह चुका है कि पालन करना ही होगा
इससे पहले 31 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि अगर डिजिटल मीडिया संबंधी नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों पर रोक नहीं लगाई गई है, तो ट्विटर को IT की नई गाइडलाइन का पालन करना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट में वकील अमित आचार्य ने याचिका लगाई थी, इसमें उन्होंने ट्विटर द्वारा नियमों का पालन न करने का दावा किया था। इस पर जस्टिस रेखा पल्ली ने केंद्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा था।
नए आईटी नियमों का पालन कर रहे- ट्विटर
हालांकि ट्विटर ने कोर्ट के सामने यह दावा किया था है कि वो नए नियमों का पालन कर रहा है। इसी के साथ एक स्थानीय अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है। जबकि सरकार ने इस दावे को नकार दिया। इस पर कोर्ट ने कहा, अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई है, तो ट्विटर को नियम मानने पड़ेंगे।
क्या है मामला?
दरअसल, वकील अमित आचार्य ने याचिका दायर कर कहा था कि केंद्र सरकार ने इसी साल 25 फरवरी को नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को जारी करते हुए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 3 महीने के अंदर इस पर अमल करने का निर्देश दिया था। लेकिन ट्विटर द्वारा समय सीमा खत्म होने के बाद भी शिकायतों के निवरण के लिए स्थानीय शिकायत अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। याचिका में मांग की गई है कि ट्विटर को आदेश दिया जाए कि वह शिकायतों के निस्तारण के लिए स्थानीय अधिकारी की नियुक्ति करे। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र से भी कहा जाए कि वह यह सुनिश्चित करे कि नए नियम लागू हों।
आईटी नियम ना मानने पर यूजर्स ने लगाई लताड़
डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर मेंबर अरविंद गुप्ता ने ट्वीट किया, ट्वीटर सक्रिय ना होने के आधार पर डि वैरिफाई कर सकता है। एक तरफा शिकायत के आधार पर या अपने फैसले पर सस्पेंड कर सकता। एक तरफा फैक्ट चेक के आधार पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग लगा सकता है। अपारदर्शी एल्गोरिथम और पूर्वाग्रह के आधार पर काम करता है, लेकिन भारतीय कानूनों का पालन नहीं करेगा।
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