
नई दिल्ली। भारत सरकार, असम सरकार ने पूर्वोत्तर में सक्रिय आठ उग्रवादी आदिवासी ग्रुप्स के साथ शांति के लिए समझौता किए हैं। इन उग्रवादी आदिवासी समूहों ने पीस एग्रीमेंट पर साइन कर
स्थायी शांति स्थापना में सरकार की मदद का आश्वासन दिया है। सरकार ने भी उनके मांगों पर ध्यान देने के लिए आश्वस्त किया है। इस समझौते पर हस्ताक्षर गृह मंत्री अमित शाह व असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में हुई।
इन उग्रवादी संगठनों ने किया शांति समझौते पर हस्ताक्षर
केंद्र सरकार और असम के 8 आदिवासी उग्रवादी संगठनों ने असम के कुछ क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी इस दौरान वहां रहे। समझौता पर साइन करने वालों में ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, असम के आदिवासी कोबरा मिलिटेंट, बिरसा कमांडो फोर्स, संथाल टाइगर फोर्स और आदिवासी पीपुल्स आर्मी सहित 8 उग्रवादी संगठनों ने शांति समझौता पर साइन किया। इस त्रिपक्षीय समझौते में केंद्र सरकार व राज्य सरकार भी शामिल हुई। यह समूत 2012 से संघर्ष विराम किए हुए हैं और अपने शिविरों में रह रहे हैं।
दो उग्रवादी संगठनों ने नहीं किया साइन
परेश बरुआ और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के नेतृत्व वाले प्रतिबंधित उल्फा का कट्टरपंथी गुट इस शांति समझौते में शामिल नहीं हुआ। राज्य सरकार ने दावा किया है कि अन्य सभी सक्रिय विद्रोही गुटों ने सरकार के साथ शांति समझौता कर लिया है।
कई गुट इस साल कर चुके हैं सरेंडर
राज्य सरकार के अनुसार तिवा लिबरेशन आर्मी व यूनाइटेड गोरखा पीपुल्स ऑगनाइजेशन के सभी कैडर्स ने जनवरी में सरेंडर किया। इन लोगों ने भारी मात्रा में हथियारों, गोला बारुद भी सौंप दिए। अगस्त में कुकी आदिवासी संघ से जुड़े उग्रवादियों ने अपने हथियार रख दिए। इसी तरह 2020 दिसंबर में बोडो उग्रवादी समेत एनडीएफबी के विभिन्न गुटों के 4100 से अधिक कैडर्स ने अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया।
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