पब्जी खेलने की वजह से दिमाग में जम गया खून का थक्का, बच्चा हाथ-पैर भी नहीं हिला पा रहा था

Published : Sep 02, 2019, 01:39 PM ISTUpdated : Sep 02, 2019, 01:48 PM IST
पब्जी खेलने की वजह से दिमाग में जम गया खून का थक्का, बच्चा हाथ-पैर भी नहीं हिला पा रहा था

सार

पब्जी खेलने के वजह से 19 साल के एक लड़के को स्ट्रोक आ गया, उसके दिमाग में खून के थक्के जमा हो गए। मामला हैदराबाद का है। मां-पिता ने कहा कि बच्चा दिन में 8 से 10 घंटे पब्जी खेलता था। गनीमत रही कि सही वक्त पर उसे आईसीयू में भर्ती करा दिया गया, जिससे की जान बच गई।   

हैदराबाद. पब्जी खेलने के वजह से 19 साल के एक लड़के को स्ट्रोक आ गया, उसके दिमाग में खून के थक्के जमा हो गए। मामला हैदराबाद का है। मां-पिता ने कहा कि बच्चा दिन में 8 से 10 घंटे पब्जी खेलता था। गनीमत रही कि सही वक्त पर उसे आईसीयू में भर्ती करा दिया गया, जिससे की जान बच गई। 

हाथ-पैर नहीं हिला पा रहा था  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़के के घरवालों ने बताया कि 26 अगस्त के दिन वो अपना सीधा हाथ और पैर नहीं हिला पा रहा है। उसके बाद उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। 

थक्का जमने से पहले वजन हुआ था कम

डॉक्टर्स के मुताबिक लड़के को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, उसके दिमाग में खून के थक्के जम गए थे। इससे कुछ दिन पहले एक महीने के अंदर उसका 3 से 4 किलो वजह भी कम हुआ। डिहाइड्रेशन की भी शिकायत थी। बच्चा टेंशन में था। दिन में बहुत देर तक पब्जी खेलने की वजह से ऐसा हुआ। 

-  हॉस्पिटल के मुताबिक, इस उम्र में ऐसे स्ट्रोक के केस कम ही आते हैं। इसके पीछे की वजह लाइफ स्टाइल है। हॉस्पिटल के एक वरिष्ठ डॉक्टर विनोद कुमार ने बताया कि वीडियो गेम खेलने की वजह से लड़के का एक महीने में 3-4 किलो वजन कम हो गया था। 

कंबल के अंदर खेलता था गेम 

मां ने बताया कि वो रात में 9 बजे से लेकर 4 बजे तक गेम खेलता था। सुबह न्यूजपेपर बांटने के लिए उठता था। फिर कॉलेज जाता था, लेकिन वहां भी टाइम मिलने पर पब्जी खेलने लगता था। फिर घर आता और रात में जब सब लोग सो जाते तो वो कंबल के अंदर छुपकर गेम खेलता था।

- पिता ने बताया कि वह दिन में कम से कम 8 से 10 घंटे पब्जी खेलता था। खेलते वक्त कुछ नहीं खाता था। सिर्फ पानी पीकर रहता था। इन्हीं सबकी वजह से उसकी तबीयत खराब हो गई। 

- लड़के को जो स्ट्रोक हुआ उसे इस्केमिक स्ट्रोक कहा जाता है। इस प्रकार के स्ट्रोक ज्यादातर बुजुर्गों को होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जून 2018 में वीडियो गेम की लत को मेंटल हेल्थ डिसॉर्डर घोषित किया है।

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