
दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल क्रेंद सरकार से खासे नाराज दिख रहे हैं। उन्होंने बीते दिन सोमवार (19 फरवरी) को दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी के अधिकारियों ने भारतीय जनता दल (BJP) के दबाव के कारण काम करने से मना कर दिया है। इसकी वजह से गंभीर संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि बढ़े हुए पानी के बिलों के समाधान के लिए प्रस्तावित वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम को अधिकारियों ने रोक दिया है।
वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम को अधिकारियों द्वारा रोके जाने के क्रम में केजरीवाल ने कहा कि अगर योजना लागू नहीं हुई तो उनकी आम आदमी पार्टी दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल ने जवाब देते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना से अधिकारियों को योजना को लागू करने का निर्देश देने या इससे इनकार करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।
भाजपा के लोग दिल्ली को बर्बाद करना चाहते हैं-केजरीवाल
केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में कहा कि बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने मोहल्ला क्लिनिक, CCTV,अस्पतालों के लिए दवाएं, फरिश्ते योजना और DTC पेंशन जैसी योजनाओं में बाधा डाली है। इसके अलावा उन्होंने कहा, "दिल्ली आधा राज्य है, लेकिन हमें लगता है कि यह 5 फीसदी भी राज्य नहीं है। अगर दिल्ली पूर्ण राज्य होती तो कोई भी अधिकारी मुख्यमंत्री या मंत्रियों के आदेशों की अनदेखी करने की हिम्मत नहीं कर पाता। उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया होता।"
उन्होंने कहा, "अगर वे काम नहीं करेंगे तो सरकार कैसे चलेगी, क्या सरकार दो दिन भी चल सकती है?” क्या यह केंद्र सरकार को शोभा देता है, क्या यह भाजपा को शोभा देता है? दिल्ली की जनता दुखी या बीमार हो तो भाजपा को खुशी होती है। भाजपा के लोग दिल्ली को बर्बाद करना चाहते हैं।''
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