राज्यों में विपक्षी पार्टियों की सरकारों पर राज्यवर्धन राठौर ने साधा निशाना, बोले- मुफ्त की रेवड़ियों के लिए पैसे हैं, कर्मचारियों के वेतन के लिए नहीं

Published : Jun 14, 2023, 12:32 PM ISTUpdated : Jun 14, 2023, 12:38 PM IST
Rajyavardhan Rathore

सार

भाजपा प्रवक्ता राज्यवर्धन राठौर ने मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर राज्यों में चल रही विपक्ष की सरकारों पर निशाना साधा है। राठौर ने कहा कि इन पार्टियों के पास विज्ञापनों और मुफ्त के गिफ्ट्स के लिए पैसे हैं, कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं।

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कर्नल राज्यवर्धन राठौर (रिटायर) ने सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिए जाने को लेकर राज्यों में चल रही विपक्षी पार्टियों की सरकारों पर निशाना साधा है। उन्होंने इसके लिए मुफ्त की रेवड़ियों की राजनीति को जिम्मेदार बताया है। राठौर ने कहा कि मुफ्त के गिफ्ट्स की राजनीति ने कई विपक्ष शासित राज्य सरकारों को वित्तीय आपदा के कगार पर धकेल दिया है।

राठौर ने इस संबंध में कई ट्वीट किए। उन्होंने बताया कि राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पंजाब वित्तीय कुप्रबंधन के स्पष्ट उदाहरण बन गए हैं। पंजाब में आप (आम आदमी पार्टी) की सरकार है। राज्य सरकार के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। वे राज्य सरकार के खाली खजाने पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में सत्ता में है। यहां राज्य सरकार के 15 हजार से अधिक कर्मचाकियों को अब तक मई महीने का वेतन मिलने का इंतजार है।

 

 

आंध्र प्रदेश में खाली हो गया सरकार का खजाना

राठौर ने अपने ट्वीट में कहा कि आंध्र प्रदेश में YSR कांग्रेस की सरकार है। यहां राज्य सरकार का खजाना खत्म हो गया है। इससे कर्मचारी निराश हैं। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। यहां वेतन मिलने में देर होने से बिजली विभाग के कर्मचारी नाराज हैं। बीआरएस शासित तेलंगाना में 3.5 लाख कर्मचारियों की वेतन को लेकर रातों की नींद हराम है।

मुफ्त की रेवड़ियों की राजनीति के चलते राज्यों की आर्थिक स्थिति हुई बदहाल

राठौर ने विपक्षी दलों पर अपने शासन वाले राज्यों की आर्थिक स्थिति को मुफ्त के गिफ्ट्स के चक्कर में आर्थिक मुसीबत में डालने के लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शासन के ढांचे में हर सरकारी कर्मचारी रीढ़ की हड्डी की तरह होता है। उन्हें वित्तीय संकट में डालना विपक्षी शासित राज्य सरकारों की ओर से राजकोषीय आपदा का स्पष्ट संकेत है।"

उन्होंने कहा, "यह देखना चौंकाने वाला है कि सत्ता की भूखी इन पार्टियों के पास विज्ञापनों और मुफ्तखोरी की राजनीति के लिए पर्याप्त धन है, लेकिन अपने कर्मचारियों के लिए उनके हाथ खाली हैं।"

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