
Congress President Election: कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव का ऐलान हो चुका है। नामांकन की तारीख नजदीक आ रही, उधर कार्यकर्ताओं का लगातार राहुल गांधी को पुन: अध्यक्ष बनाए जाने की मांग तेज होती जा रही है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, यूपी समेत 8 राज्यों में राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया है। लगातार उठ रही मांग पर मंगलवार को कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से ही कराया जाएगा। प्रस्ताव पारित करने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाया जाना बाध्यकारी है। वह अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे या नहीं? यह नामांकन प्रक्रिया के बाद ही पता चल सकेगा।
लोग अब समझ चुके हैं कि राहुल गांधी नेतृत्व कर सकते हैं लेकिन...
जयराम रमेश ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत जोड़ो यात्रा अभी 13 दिन ही बीती है। इतने ही दिनों में लोगों को राहुल गांधी की क्षमता का अहसास हो चुका है। वह रोज उन क्षेत्रों से गुजर रहे हैं जहां आमजन परेशान है। लोगों के दु:ख-दर्द साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी का अभी पूरा फोकस भारत जोड़ो यात्रा पर है। रही अध्यक्ष पद के चुनाव की बात तो वह तो चुनाव प्रक्रिया से ही तय होगी। लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराया जाएगा। कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकेगा। नामांकन के बाद एक से अधिक प्रत्याशी होंगे तो वोटिंग कराई जाएगी। अगर आम सहमति संभव नहीं तो पार्टी चुनाव के लिए तैयार है। 9,000 पीसीसी प्रतिनिधि लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
प्रदेशों का प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं
उन्होंने बताया कि प्रदेशों से लगातार राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष पद संभालने का अनुरोध किया जा रहा है। प्रस्ताव भी पारित हो रहे हैं। लेकिन यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं हैं। राहुल गांधी भी इसको मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। वह अध्यक्ष बनेंगे या नहीं, यह तो पता नामांकन प्रक्रिया के बाद ही चलेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेसी उत्साहित हैं क्योंकि वे पिछले 13 दिनों से गांधी को चलते हुए देख रहे हैं। किसी ने किसी को प्रस्ताव पारित करने के लिए नहीं कहा। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित हैं। राहुल गांधी ने किसी को कोई प्रस्ताव पारित करने के लिए नहीं कहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने किसी से नहीं कहा है। वे पिछले 13 दिनों से गांधी को चलते हुए देख रहे हैं। वे जानते हैं वह हर रोज जिस दर्द से गुजर रहा है। वे सभी उससे संबंधित हो सकते हैं। यह स्वाभाविक है कि वे प्रस्ताव पारित करते हैं। लेकिन संकल्प का कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होता है।
यह भी पढ़ें:
यूके के लीसेस्टरशायर में भारतीय समुदाय पर हमला, हिंदू प्रतीकों को तोड़ा गया, See video
जज साहब! मेरी मौत के बाद शव को पत्नी-बेटी और दामाद न छुएं, न अंतिम संस्कार करें
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.