
Kejriwal on Tihar Jail administration: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जेल में इंसुलिन नहीं दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। केजरीवाल ने तिहाड़ जेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि 31 दिनों से उनकी इंसुलिन को रोक दिया गया है। जेल अधिकारी लगातार झूठे और निराधार आरोप लगा रहे हैं। जेल प्रशासन सत्तारूढ़ बीजेपी के इशारों पर उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। केजरीवाल ने बीते हफ्ते दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट में भी गुहार लगाई है कि उनको इंसुलिन आपूर्ति के लिए जेल प्रशासन को डायरेक्शन दिया जाए। सोमवार को कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने एम्स से रिपोर्ट मांगने के साथ निजी डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की याचिका को खारिज कर दिया। केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को अरेस्ट किया था।
कोर्ट ने याचिका कर दी खारिज
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपने डॉक्टर से परामर्श लेने की याचिका को खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि एम्स दिल्ली मेडिकल बोर्ड का गठन करे ताकि यह पता चल सके कि उन्हें शुगर लेवल कंट्रोल के लिए इंसुलिन की जरूरत है या नहीं। इसके अलावा उनके अन्य मेडिकल जरुरतों का भी बोर्ड पता लगाएगा। स्पेशल जज कोवरी बावेजा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने डॉक्टर से कंसल्ट करने की आवश्यकता नहीं है। एम्स मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट देगा।
उधर, मामला तूल पकड़ने के बाद जेल प्रशासन ने दावा किया कि केजरीवाल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एम्स के सीनियर डॉक्टर्स से परामर्श दिलाया गया। डॉक्टर ने सबकुछ ठीक होने की बात कही और इंसुलिन नहीं बढ़ाई। जबकि अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि एम्स के डॉक्टर्स ने कभी नहीं कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि तिहाड़ जेल के अधिकारियों के बयान झूठे हैं। मैं रोजाना इंसुलिन मांग रहा हूं। मैंने ग्लूकोमीटर रीडिंग (दिन में तीन बार) दिखाई। और उन्हें बताया कि शुगर लेवल हाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स के डॉक्टरों ने कभी नहीं कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि वे मेडिकल डेटा और मेडिकल हिस्ट्री देखने के बाद ही कुछ कहेंगे। पढ़िए पूरी खबर…
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