Delhi Riots : उमर खालिद ने की थी दंगों की प्लानिंग, चार घंटे तक चली दलीलें, कोर्ट के सामने रखे गए पुख्ता सबूत

Published : Feb 02, 2022, 05:00 PM ISTUpdated : Feb 02, 2022, 06:53 PM IST
Delhi Riots : उमर खालिद ने की थी दंगों की प्लानिंग, चार घंटे तक चली दलीलें, कोर्ट के सामने रखे गए पुख्ता सबूत

सार

Delhi riots conspiracy : दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका और साजिश की परतें खोलने के लिए बुधवार को वरिष्ठ वकील अमित प्रसाद ने कड़कड़डूमा कोर्ट में कई वॉट्सऐप चैट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज पेश किए। इनमें साफ दिख रहा है कि उमर खालिद ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दंगे भड़काने की सुनियोजित साजिश रची। 

नई दिल्ली। फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों (Delhi riots) को लेकर जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Umar khalid)की बड़ी साजिश को लेकर कड़कड़डूबा कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान वकीलों ने उमर खालिद के खिलाफ बड़े पैमाने पर सबूत पेश किए। इसमें साफ जाहिर हो रहा है कि वॉट्सऐप ग्रुप पर दिल्ली को दहलाने की प्लानिंग हुई थी। कोर्ट में सबूत के तौर पर उस मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया, जिसमें लिखा है 'आग लगाने की पूरी तैयारी है।' इस मौके पर कोर्ट में कुछ चश्मदीद भी पेश किए गए। यह वो लोग थे, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हिस्सा बनने गए थे, लेकिन हिंसा की जानकारी होने पर वापस लौट गए। 

शांतिपूर्ण बैठक बताकर तेजाब और लाठी, डंडे इकट्‌ठे किए 
जज अमिताभ रावत की वर्चुअल कोर्ट में यह सुनवाई दोपहर 12 बजे शुरू हुई। विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में  4 घंटे तक अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने 15 और 16 जनवरी को चांद बाग में हुई एक बैठक की ओर इशारा किया। प्रसाद ने कहा कि धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने लिए गए बयान बताते हैं कि इस बैठक में डंडे, पत्थर, लाल मिर्च, तेजाब इकट्‌ठा किया गया था। अगर शांतिपूर्ण विरोध के लिए बैठक आयोजित की गई थी, तो इस तरह का सामान इकट्ठा करने की क्या जरूरत थी।  वकील ने ओवैस नामक एक ऐसे ही सदस्य का बयान कोर्ट में पेश किया। उसका स्क्रीनशॉट पेश करते हुए बताया कि ओवैस ने पूछा था कि पुलिस पर हमला करने के लिए लोगों को लाल मिर्च पाउडर क्यों दिया गया। उन्होंने सबूत के तौर पर कई वॉट्सऐप चैट भी कोर्ट के सामने पेश किए, जिनमें यह बात साफ होती है कि दिल्ली दंगे सुनियोजित हिंसा के तहत कराए गए थे।


उमर खालिद ने कहा- भाषण से काम नहीं चलेगा, खून बहाना पड़ेगा
अनस तनवीर नामक एक वकील ने इसमें ओवैस से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि आप हमारी कब्र क्यों खोद रहे हैं। एक अन्य व्यक्ति वॉट्सऐप चैट पर पूछा-  ये लड़ाई हिंदुस्तान की लड़ाई से मुसलमानों की लड़ी क्यू बंटी जा रही है? राहुल रॉय कहते हैं यह रणनीति में बदलाव हैं। एक व्यक्ति ने बयान दिया है कि महिलाओं और पुरुषों को लाठी, पत्थर, गैवल आदि दिए गए।  यह बड़े षड्यंत्र की पुष्टि करते हैं। वकील ने बताया कि इस बैठक में उमर खालिद ने कहा था - सरकार मुसलमानों के खिलाफ है। भाषण से काम नहीं चलेगा। खून बहाना पड़ेगा। वकील ने कोर्ट में एक गवाह का यह बयान पढ़ा। 

10 बसों का इंतजाम किया, 250 महिलाओं को लामबंद किया
वकील ने कोर्ट को बताया कि हमें हिंसा को रोकने की जरूरत है। लेकिन इस वॉट्सऐप मैसेजेस में साफ दिख रहा है कि उमर खालिद, खालिद सैफी और अन्य लोगों की बातचीत में - आग लगवाने की पूरी तैयारी थी। 
उन्होंने कोर्ट में विलियम नामक व्यक्ति का बयान पढ़ा। इसमें कहा गया था कि 10 बसों का इंतजाम किया गया था। 250 महिलाओं और बच्चों को जंतर-मंतर जाने के लिए लामबंद किया गया। विलियम ने बताया कि मुझे वहां पर उमर खालिद मिला और उसने कहा कि जहांगीरपुरी में कई बांग्लादेशी हैं। उन्हें CAA और NRC  के बारे में बताओ। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में कोई भी स्थानीय महिला विरोध का हिस्सा नहीं थी। वॉट्सऐप चैट बताते हैं कि इसमें कोई भी महिला नहीं थी। देवांगना कलिता, सफूरा जरगर, अन्य लोगों ने भीड़ जुटाई। यह हिंसा जैविक नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हिंसा थी। उन्होंने बताया कि भीम आर्मी को भी प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के लिए बुलाया गया था। 

कल फिर 11 बजे से होगी सुनवाई 
वकील ने कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने एक बयान से पुष्ट होता है कि जाह्नवी, नताशा, उमर खालिद और तबरेज दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र में शामिल थे। मजिस्ट्रेट के सामने बयान में कहा गया कि बुर्का पहने महिलाओं को लामबंद किया गया और पिंजा तोड़ के सदस्य जुटाए गए। इस प्रदर्शन में कोई स्थानीय लोग मौजूद नहीं थे। सुनवाई के दौरान तमाम सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत पेश किए गए। वरिष्ठ वकील अमित प्रसाद इस मामले में कल भी अपना पक्ष रखेंगे। गुरुवार सुबह 11 बजे से फिर मामले की सुनवाई होगी। 

क्या है मामला 
दिल्ली में फरवरी 2020 में केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध में दिल्ली में दंगे हुए थे। इसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने इस मामले में जेएनयू के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। पुलिस के मुताबिक उमर खालिद ने 8 फरवरी को बैठक कर दंगों के लिए साजिश रची। इसके अलावा उस पर भड़काऊ भाषण देने और अन्य राज्यों में भी दंगा कराने के आरोप हैं।  

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