नेताजी सुभाषचंद्र के पौत्र की मांग, 'नागरिकता कानून में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए'

Published : Jan 20, 2020, 05:34 PM ISTUpdated : Jan 20, 2020, 05:41 PM IST
नेताजी सुभाषचंद्र के पौत्र की मांग, 'नागरिकता कानून में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए'

सार

पश्चिम बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष चंद्र बोस ने सोमवार को केंद्र से आग्रह किया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत मुस्लिमों को भी नागरिकता दी जानी चाहिए।

कोलकाता. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पौत्र एवं पश्चिम बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष चंद्र बोस ने सोमवार को कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों-दोनों के ही द्वारा ''भय का माहौल'' उत्पन्न किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत मुस्लिमों को भी नागरिकता दी जानी चाहिए।

भाजपा के उपाध्यक्ष चंद्र बोस ने कहा

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को मुद्दे पर एक लिखित स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। बोस ने कहा, ''नागरिकता के मुद्दे पर भय का माहौल उत्पन्न किया जा रहा है। सत्तारूढ़ और विपक्षी दल-दोनों ही यह काम कर रहे हैं।''

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ''केवल इस वजह से कि (कानून) संसद ने पारित किया है, इसका इस्तेमाल प्रदर्शनों की अनदेखी कर लोगों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता। यही बात विपक्षी दलों पर भी लागू है जो जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।''

सीएए कानून धर्म आधारित नहीं है

बोस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्पष्ट उल्लेख कर चुके हैं कि कानून धर्म आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ अन्य नेताओं के बयानों से भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

बोस ने कहा, ''इससे निपटने के लिए, मेरा मानना है कि नए कानून में यह उपबंध शामिल किया जाना चाहिए कि सीएए धर्म आधारित नहीं है...और मुसलमानों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।''

भाजपा के राज्य स्तर के कुछ नेताओं से बोस के बयान को लेकर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बोस ने पूर्व में भी सीएए में मुसलमानों को शामिल किए जाने की पैरवी की थी।

उन्होंने पिछले महीने ट्वीट किया था, ''यदि सीएए 2019 का संबंध किसी धर्म से नहीं है तो हम केवल हिन्दुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों और पारसियों का ही उल्लेख क्यों कर रहे हैं? मुसलमानों को भी शामिल क्यों नहीं करते? पारदर्शिता होनी चाहिए।''


(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

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