अमेरिकी कपल ने 13 शहरों की भारत यात्रा में ₹10 लाख खर्च क्यों किया-क्या ये सामान्य है या चौंकाने वाला ट्रैवल ट्रेंड? क्या लग्ज़री होटल, फ्लाइट और प्रीमियम अनुभव भारत को इतना महंगा बना सकते हैं, या खर्च का असली कारण यात्रा स्टाइल है? सोशल मीडिया पर बहस: क्या भारत सच में महंगा हो गया है या बैकपैकिंग बनाम लक्ज़री ट्रैवल का बड़ा फर्क सामने आया है?
नई दिल्ली: "क्या भारत में एक महीना गुजारने के लिए 10 लाख रुपये की मोटी रकम खर्च हो सकती है?" सोशल मीडिया पर इस समय यही एक सवाल हर किसी की जुबान पर तैर रहा है। आमतौर पर पश्चिमी देशों के पर्यटकों के बीच भारत को एक बेहद बजट-फ्रेंडली और किफायती पर्यटन स्थल (Budget-friendly Travel Destination) माना जाता है। लेकिन एक अमेरिकी कपल ने जब अपनी एक महीने की भारत यात्रा का वित्तीय लेखा-जोखा इंस्टाग्राम पर साझा किया, तो देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गईं। एलेक्स और अमेलिया नाम के इन अमेरिकी यात्रियों ने 30 दिनों के भीतर भारत के 13 शहरों की खाक छानी और जब लौटकर हिसाब लगाया, तो कुल खर्च $10,605 यानी भारतीय मुद्रा में पूरे 10 लाख रुपये के पार जा चुका था।

अंदरूनी कबूलनामा: "जब फाइनल बिल आया, तो हमारे भी होश उड़ गए"
इस आलीशान यात्रा के खत्म होने के बाद एलेक्स और अमेलिया ने सोशल मीडिया पर अपनी पूरी खर्च रिपोर्ट (Expense Report) सार्वजनिक की। उन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि यह कुल रकम उनकी खुद की उम्मीदों और बजट से कहीं ज्यादा थी।
कपल ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अगर हम यह कहें कि जब हमने खर्च का हिसाब लगाया और देखा कि भारत में एक महीने के दौरान हमने कितना खर्च किया, तो हमें हैरानी नहीं हुई, तो हम झूठ बोल रहे होंगे।" उन्होंने बताया कि औसतन उनका रोजाना का खर्च $354 यानी करीब 33,627 रुपये आया। लेकिन इस बेतहाशा खर्च के पीछे का असली सस्पेंस और वजह क्या थी?

रूट का चक्रव्यूह: 30 दिनों में 13 शहर और ट्रांसपोर्ट का भारी जाल
जांच करने पर पता चला कि इस भारी-भरकम बजट की सबसे बड़ी वजह उनकी यात्रा की रफ्तार और रूट की प्लानिंग थी। सिर्फ चार हफ्तों के भीतर 13 अलग-अलग शहरों को कवर करने का मतलब था कि उन्हें अपना आधा समय सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने में ही बिताना पड़ा।
गतिशीलता को बनाए रखने के लिए इस कपल ने किसी भी स्तर पर बजट यात्रा का विकल्प नहीं चुना। उन्होंने इस 30 दिनों की टाइमलाइन में:
- 6 डोमेस्टिक फ्लाइट्स बुक कीं।
- 6 लंबी दूरी की प्राइवेट कार राइड्स किराए पर लीं।
- 2 प्रीमियम ट्रेन यात्राएं कीं।
लगातार उड़ानों और निजी वाहनों के इस वीआईपी इंतजाम ने उनके ट्रैवल बजट को आसमान पर पहुंचा दिया और ट्रांसपोर्टेशन ही उनका सबसे बड़ा खर्च बनकर उभरा।
फाइव-स्टार का सम्मोहन: "सस्ता नहीं है भारत, अगर राजाओं की तरह रहना हो"
अमेलिया ने अपनी पोस्ट के जरिए उन ट्रैवल ब्लॉगर्स के दावों को भी चुनौती दी जो भारत को बेहद सस्ता बताते हैं। कपल ने बैकपैकिंग या सस्ते होमस्टे (Budget Homestays) को पूरी तरह दरकिनार कर आलीशान होटलों और प्रीमियम अनुभवों को प्राथमिकता दी।
उन्हें भारत के महंगे और हेरिटेज होटलों में ठहरने के लिए हर एक रात का औसतन $127 (लगभग 12,064 रुपये) चुकाना पड़ा। उन्होंने साफ कहा, "अगर आप सिर्फ सबसे सस्ते विकल्पों की तलाश में नहीं हैं, तो रहने का खर्च उतना कम नहीं होता जितना दूसरे यात्री इंटरनेट पर दावा करते हैं।" इसके साथ ही, रोज तीन वक्त का खाना महंगे और प्रीमियम रेस्टोरेंट्स में खाने की वजह से भी उनका बिल लगातार बढ़ता चला गया।
इंटरनेट पर छिड़ी जंग: 'बैकपैकर' बनाम 'महाराजा लाइफस्टाइल'
जैसे ही यह पोस्ट इंस्टाग्राम पर वायरल हुई, सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंट गए। कुछ लोग इस आंकड़े को देखकर स्तब्ध थे, तो कुछ को यह बिल्कुल वाजिब लगा। एक यूजर ने कमेंट किया, "वाह! एक महीने में 10 लाख? आप लोग यकीनन किसी राजा-महाराजा की तरह रहे होंगे।" वहीं, एक अन्य जागरूक यूजर ने असलियत से पर्दा उठाते हुए लिखा कि इस कपल ने अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ही $100k (लगभग 83 लाख रुपये) की तगड़ी सेविंग कर रखी थी, इसलिए वे कोई पाई-पाई बचाने वाले बैकपैकर नहीं थे। विशेषज्ञों का भी मानना है कि महामारी (Post-Pandemic Inflation) के बाद से भारत में प्रीमियम टूरिज्म, लग्जरी होटल्स और अच्छी क्वालिटी के खाने-पीने के दामों में भारी उछाल आया है, जिसके कारण शाही अंदाज में घूमने वालों का बजट अब पहले जैसा नहीं रहा।


