बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। यदि यही रुझान नतीजों में बदलता है तो इस सीट पर 35 साल से बीजेपी का कब्जा खत्म हो सकता है।
Bankipur Bypoll Result 2026: जन सुराज के संस्थापक और नेता प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। दोपहर 3 बजे 19वें राउंड के बाद पीके 11,289 वोटों से आगे चल रहे हैं। अगर मौजूदा रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो बांकीपुर सीट पर पिछले 35 साल से चला आ रहा बीजेपी का कब्जा खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि यह उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन चुका है।
BJP के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है रिजल्ट
यह चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीदवार बदलने के बाद आखिरकार नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारना पड़ा। हालांकि, प्रशांत किशोर पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सबसे चर्चित चेहरा बने रहे, जबकि नीरज कुमार सिन्हा अपेक्षाकृत कम चर्चित उम्मीदवार रहे। अगर बीजेपी यह सीट हारती है, तो इसे पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
PK ने दो महीने पहले से शुरू किया चुनाव प्रचार
प्रशांत किशोर ने बीजेपी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से करीब दो महीने पहले ही बांकीपुर में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। इस दौरान उन्होंने लगातार जनसभाएं कीं, घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और बूथ स्तर तक अपना संगठन मजबूत किया। जल्दी प्रचार शुरू करने का फायदा जन सुराज को मिला, क्योंकि इससे पार्टी को अन्य प्रमुख दलों की तुलना में संगठन तैयार करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए अधिक समय मिला।
BJP ने भी झोंकी पूरी ताकत
बांकीपुर सीट बचाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी। पार्टी ने लगभग 40 स्टार प्रचारकों और हजारों कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार में उतारा। चुनाव के अंतिम चरण में कई वरिष्ठ नेताओं ने लगातार जनसभाएं, रोड शो और चुनावी कार्यक्रम किए ताकि सीट को बरकरार रखा जा सके।
नितिन नवीन की साख भी दांव पर
यह उपचुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने बिहार विधानसभा में लगातार पांच बार बांकीपुर का प्रतिनिधित्व किया है और उनका राजनीतिक सफर इस सीट से गहराई से जुड़ा रहा है। विधायक रहने के बाद उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और बाद में वे राज्यसभा पहुंचे। हालांकि इस बार वे उम्मीदवार नहीं थे, लेकिन पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सक्रिय रहे। उन्होंने कई रोड शो, जनसभाएं और कार्यकर्ता बैठकों में हिस्सा लेकर पार्टी के लिए प्रचार किया। अगर बीजेपी यह सीट हारती है, तो इसे नितिन नवीन के लंबे समय से जुड़े राजनीतिक गढ़ में पार्टी की बड़ी हार के रूप में देखा जाएगा।
युवा मतदाताओं और स्थानीय मुद्दों पर फोकस
प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव अभियान में रोजगार, शिक्षा, सुशासन और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने पहली बार वोट देने वाले Gen Z मतदाताओं से भी लगातार संवाद किया और उन्हें अपने अभियान से जोड़ने का प्रयास किया।
भोजपुर एनकाउंटर भी बना चुनावी मुद्दा
बांकीपुर उपचुनाव भोजपुर एनकाउंटर के बाद हुआ, जिसमें भारत तिवारी की मौत हुई थी। यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक मुद्दा बना रहा। प्रशांत किशोर ने अपनी कई जनसभाओं में इस घटना का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
अगर अंतिम नतीजों में प्रशांत किशोर की जीत होती है और लालू यादव की RJD पीछे रह जाती है, तो जन सुराज बिहार की राजनीति में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर सकती है। साथ ही, यह जीत प्रशांत किशोर के लिए भी ऐतिहासिक होगी, क्योंकि इसके साथ उन्हें पहली बार बिहार विधानसभा में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। सदन के भीतर वे सीधे जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की स्थिति में होंगे।


