दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आज 3 अगस्त को घोषित होंगे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, जिस पर पूरे मध्य प्रदेश की नजर है।

Datia Election Result 2026: मध्य प्रदेश की राजनीति में अहम मानी जाने वाली दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे सोमवार 3 अगस्त को आ रहे हैं। यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। इस चुनाव के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजर है, क्योंकि माना जा रहा है कि इनके राजनीतिक असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। यह चुनाव न सिर्फ कांग्रेस के लिए अहम है, बल्कि बीजेपी के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की साख भी दांव पर है।

नरोत्तम मिश्रा की सियासी विरासत दांव पर

दतिया विधानसभा सीट को लंबे समय से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने इस बार बड़ा बदलाव करते हुए उनकी जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया। अगर बीजेपी इस सीट पर जीत दर्ज करती है, तो यह संदेश जाएगा कि पार्टी किसी एक नेता पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपने मजबूत संगठन और कैडर के दम पर चुनाव जीतने की क्षमता रखती है। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बीजेपी को जीत मिलती है, तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए केंद्रीय राजनीति या पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।

बीजेपी ने बदला उम्मीदवार, संगठन की ताकत पर दांव

इस बार भारतीय जनता पार्टी ने लंबे समय तक दतिया का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी और भीतरघात की चर्चाएं लगातार होती रहीं। इन अटकलों को खत्म करने के लिए बीजेपी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, एक दर्जन से ज्यादा मंत्री, सांसद और विधायक लगातार चुनाव प्रचार में जुटे रहे। पार्टी ने संगठन को मजबूत तरीके से मैदान में उतारते हुए हर वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई।

जातीय समीकरण साधने पर बीजेपी का खास फोकस

दतिया विधानसभा में जातीय समीकरण चुनाव का अहम हिस्सा रहे। यहां ब्राह्मण मतदाता लगभग 14.8 प्रतिशत, अहिरवार-जाटव 14.7 प्रतिशत, कुशवाहा-काछी 12.2 प्रतिशत, यादव 7.4 प्रतिशत और लोधी समाज करीब 6.9 प्रतिशत है। इन सभी प्रमुख वर्गों तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी। बसई समेत उन इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया, जहां ब्राह्मण, लोधी और अन्य ओबीसी मतदाताओं की संख्या अधिक है।

कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर जताया भरोसा

कांग्रेस ने इस चुनाव में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। उन्हें सरल स्वभाव और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में जाना जाता है। राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ग्रामीण इलाकों में भी उनका प्रभाव काफी मजबूत बताया जाता है। हालांकि, मतदान के बाद कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद भी सामने आए। घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई।