
नई दिल्ली: भाजपा के एक सदस्य ने सेना में एक अहीर रेजीमेंट गठित करने की मांग करते हुए राज्यसभा में सोमवार को कहा कि हर युद्ध में अहीरों ने वीरता का प्रदर्शन किया है और वह इस सम्मान के हकदार हैं। भाजपा के हरनाथ सिंह यादव ने शून्यकाल के दौरान उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा ''इतिहास गवाह है कि अब तक हुए सभी युद्धों में अहीरों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और अभूतपूर्व शौर्य का प्रदर्शन किया।''
अहीरों में सेना में भर्ती के लिए खास जुनून
उन्होंने कहा कि अहीरों में सेना में भर्ती के लिए खास जुनून होता है। अहीर बहुल गांवों में देखें तो शायद ही ऐसा कोई गांव होगा जहां से चार पांच परिवार के लोग सेना में न गए हों। सेना में जाट, मराठा, सिख, गोरखा आदि रेजीमेंट की तर्ज पर अहीर रेजीमेंट के गठन की मांग करते हुए यादव ने कहा कि देश की सुरक्षा की खातिर बलिदान देने वाले अहीर सैनिकों के लिए, अहीर रेजीमेंट का गठन बहुत बड़ा सम्मान होगा और वे इस सम्मान के हकदार भी हैं।विभिन्न दलों के सदस्यों ने यादव के इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।
अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का मुद्दा
द्रमुक के तिरुचि शिवा ने हाल ही में जारी राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षा के नोटिस के बाद राज्य सरकार के कालेजों में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण न मिलने का मुद्दा उठाया। शिवा ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण की सुविधा केवल केंद्र सरकार के कॉलेजों में ही मिलेगी।
उन्होंने कहा ''यह आरक्षण के लिए गहरा झटका होगा।'' शिवा ने मांग की कि राज्य सरकार के कालेजों में अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के डॉ शांतनु सेन ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बंगाल किए जाने की मांग शून्य काल में उठाई। सेन ने कहा कि अल्फाबेट के क्रम से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल का नाम सबसे आखिर में आता है।
पेट्रोरसायन परियोजना के लिए आर्थिक मदद
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वी विजय साई रेड्डी ने आंध्रप्रदेश के रामयापटनम में बंदरगाह स्थापित करने संबंधी मुद्दा उठाया। रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार ने बंदरगाह के लिए 3,000 एकड़ भूमि चिह्नित की है और उसकी राय है कि बंदरगाह का निर्माण राज्य सरकार करेगी तथा इसका वित्त पोषण केंद्र सरकार की ओर से किया जाए। आंध्रप्रदेश से ही जुड़ा मुद्दा कांग्रेस सदस्य के वी पी रामचंद्र राव ने भी उठाया।
उन्होंने शून्यकाल में प्रदेश के काकीनाड़ा में एक पेट्रोरसायन परियोजना के लिए आर्थिक मदद की मांग की। राव ने कहा ''विभाजन के बाद आंध्रप्रदेश वित्तीय संकट से जूझ रहा है। इसे विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं दिया गया। अब हालत यह है कि राज्य में विकास के कार्यों के लिए भी वित्त संकट हो रहा है। पेट्रोरसायन परियोजना के लिए वित्त व्यवस्था राज्य सरकार के लिए मुश्किल है।''
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
(प्रतीकात्मक फोटो)
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