
नई दिल्ली। इस साल भारतीय नौसेना (Indian Navy) को दूसरा विमान वाहक युद्ध पोत आईएनएस विक्रांत मिल जाएगा। भारत द्वारा खुद बनाया गया विक्रांत अगस्त में नौसेना में शामिल होगा। इसपर किस लड़ाकू विमान की तैनाती होगी, इसका अभी फैसला किया जाना है। इसके लिए फ्रांस के दस्सो एविएशन कंपनी द्वारा बनाये गए राफेल एम (Rafale M) और अमेरिकी कंपनी बोइंग के F/A-18 के बीच मुकाबला है।
राफेल के समुद्री वर्जन Rafale M ने गुरुवार को गोवा में समुद्र तट पर स्थित नौ सेना के टेस्ट फैसेलिटी से टेकऑफ किया। अमेरिका के F/A 18 विमान को भी इस प्रदर्शन के लिए चुना गया है। मार्च में इस विमान द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नौसेना यह परख रही है कि उसकी जरूरत को ध्यान में रखते हुए राफेल-एम या F/A-18 कौन विमान अधिक उपयुक्त साबित होगा।
26-27 लड़ाकू विमानों की है जरूरत
नए एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए नौसेना को 26-27 लड़ाकू विमानों की जरूरत है। बता दें कि भारतीय वायु सेना को पहले ही 36 में से 33 राफेल विमान मिल गए हैं। भारत सरकार ने फ्रांस सरकार के साथ सितंबर 2016 में 59 हजार करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल विमानों का सौदा किया था। भारतीय नौ सेना वर्तमान में विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य का इस्तेमाल कर रही है। इस पोत पर रूस से खरीदे गए मिग-29 लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया है।
नौसेना ने भारत में बने तेजस विमान को रिजेक्ट कर दिया था। नौ सेना का कहना था कि एक इंजन वाला विमान उसके लिए उपयुक्त नहीं है। राफेल एम और F/A 18 दोनों विमान दो इंजन वाले हैं। राफेल एम का इस्तेमाल फ्रांस की नौ सेना कर रही है। वहीं, अमेरिकी नौ सेना द्वारा भी F/A 18 विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राफेल और F/A 18 दोनों विमानों की गिनती सबसे अच्छे लड़ाकू विमानों में होती है।
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