
Diwali Special: इस दीवाली भी पश्चिम बंगाल का पटाखा व्यवसाय मंद ही रहा है। कोरोना की वजह से दो साल से बेरंग हुए बाजार से रौनक गायब है। ग्रीन पटाखों की डिमांड आधी से कम ही रह गई है। पश्चिम बंगाल के ग्रीन पटाखा व्यवसायियों का कहना है कि केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति के बावजूद बाजार में रौनक नहीं आ सकी है। जिन बाजारों में कभी दो से ढाई हजार लोग रोज आते थे वहां भी आने वालों की संख्या आधी ही बची है। तीन साल में बाजार आधा पर सिमट कर रह गया है।
व्यापारियों ने बताया क्या है बिक्री न बढ़ने की वजह
आतिशबाजियों का बाजार दीवाली में भी नहीं बढ़ने की वजह अव्वल तो COVID-19 रहा लेकिन इसके बाद लगातार इस मार्केट में मंदी छायी हुई है। ग्रीन आतिशबाजियों का मार्केट अभी भी रफ्तार नहीं पकड़ सका है। एक व्यवसायी ने बताया कि प्री-कोविड दीवाली सीज़न में तल्लाह पार्क बाजी बाजार में 2,000-2,500 की दैनिक पैदल यात्रा की तुलना में यह संख्या लगभग 1,000-1,500 तक ही बची है। इस मार्केट के व्यापारी संघ के पदाधिकारी सरोजित अवोन ने बताया कि यहां करीब 44 स्टॉल लगाए गए हैं। प्रत्येक स्टॉल औसतन प्रतिदिन 1 लाख रुपये के आसपास की बिक्री हो रही है। जबकि 2018-19 में 2 लाख रुपये हर रोज यहां का कारोबार होता रहा है।
ग्रीन पटाखे ही सर्टिफाइड हैं बेचने के लिए, महंगे भी हैं...
दरअसल, ग्रीन पटाखे ही बेचे जाने के लिए किन्हीं भी स्टॉल पर अधिकृत होते हैं। ग्रीन पटाखों का मतलब सरकार की प्रमाणित एजेंसी द्वारा यह सभी पर्यावरण मानकों को पूरा करते हैं। क्यूआर कोड से स्कैन कर इन पटाखों के बारे में जानकारी ली जा सकती है। यह पटाखे 90 डेसीबल से कम आवाज करते हैं, यह प्रदूषण कम करते हैं। राज्य में 14 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को ही ग्रीन पटाखों के सभी मानकों को पूरा करने पर लाइसेंस रिन्यू किया गया है। व्यापारी बताते हैं कि ग्रीन पटाखों की कीमतें थोड़ी अधिक होती है। हालांकि, ग्रीन पटाखों के अलावा अमानक पटाखों को खरीदना गैर कानूनी है।
बाजार में किन पटाखों की डिमांड
बाजी बाजार के दूकानदारों की मानें तो इस बार दीवाली में आवाज करने वाले पटाखों की बजाय लाइट्स वाले पटाखों की अधिक डिमांड है। स्पार्कलर, फ्लावर पॉट्स, रोंग मोशाल, व्हिसलिंग चोरकी सहित कई ग्रीन पटाखों की खरीदी ग्राहक कर रहे हैं।
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