
नई दिल्ली। बैंक से धोखाधड़ी कर 67 करोड़ रुपये लोन लेने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक रत्न और आभूषण फर्म के हिस्सेदार को हैदराबाद में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यवसायी संजय अग्रवाल को पीएमएलए कोर्ट (PMLA Court) में पेश किया गया और कोर्ट ने उसे 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने दी जानकारी...
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को इस गिरफ्तारी की जानकारी दी है। ईडी ने बताया कि संजय अग्रवाल को 11 फरवरी को हैदराबाद में गिरफ्तार किया गया था। वह घनश्यामदास जेम्स एंड ज्वेल्स, हैदराबाद (Ghanshyamdas Gems and Jewels) में एक मैनेजिंग पार्टनर हैं, जो सोने का थोक व्यापार करता है।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि यह ऋण धोखाधड़ी मामले से संबंधित है जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), हैदराबाद को 67 करोड़ का नुकसान हुआ।
फर्जी गारंटी पर लिया था लोन
ईडी की जांच में पाया गया कि 2010-2011 में, संजय अग्रवाल ने फर्जी और जाली बैंक गारंटी और पीएनबी (PNB) द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए कवरिंग पत्रों का निर्माण करके एसबीआई से स्वर्ण सर्राफा की खरीद की। फिर स्थानीय बाजार में सोने के बुलियन को विभिन्न ज्वैलर्स और छोटे व्यापारियों को नकद में बेच दिया। इसमें आरोप लगाया गया है कि अग्रवाल द्वारा अपनी पत्नी, भाइयों और अपने कर्मचारियों के नाम पर बनाई गई कई अन्य फर्मों में नकदी को डायवर्ट किया गया था।
एजेंसी ने बताया कि बाद मे गोल्ड लोन न चुकाने पर पर एसबीआई ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि बैंक गारंटी और पत्र जाली थे। 17.08.2011 को, अग्रवाल और उनके भाइयों अजय और विनय ने हैदराबाद में अपने स्टोर पर रखे सोने और आभूषणों के पूरे स्टॉक को गुप्त रूप से हटा दिया। ईडी ने कहा कि कंपनी द्वारा लिए गए गोल्ड लोन के एवज में स्टॉक को पहले ही पीएनबी के पास गिरवी रख दिया गया था।
सीबीआई ने अग्रवाल और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी से पीएनबी को गिरवी रखे सोने और आभूषणों को उनकी फर्म द्वारा लिए गए गोल्ड लोन के बदले निकालने और इस तरह पंजाब नेशनल बैंक को ₹ 31.97 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के लिए भी मामला दर्ज किया था।
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