KBC : अमिताभ ने जिस महिला के पैर छुए, उसने तबेले में दिया था बेटी को जन्म, पत्थर से काटा था गर्भनाल

Published : Aug 23, 2019, 04:03 PM ISTUpdated : Aug 23, 2019, 04:53 PM IST
KBC : अमिताभ ने जिस महिला के पैर छुए, उसने तबेले में दिया था बेटी को जन्म, पत्थर से काटा था गर्भनाल

सार

सिंधुताई का जन्म महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। 12 साल की उम्र में सिंधुताई की शादी 30 साल के श्रीहरी सपकाल से हो गई। वे 20 साल की उम्र में 3 बच्चों की मां बन गईं।

नई दिल्ली. केबीसी-11 का शुक्रवार को प्रसारित होने वाला शो 'कर्मवीर स्पेशल एपिसोड' काफी खास होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें अमिताभ बच्चन अपनी सीट से उठकर गेस्ट के पैर छूते नजर आएंगे। इस बार की गेस्ट प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल हैं, जिन्हें 'मदर ऑफ ऑर्फन्स' कहा जाता है। सोनी टीवी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें सिंधुताई की शो में एंट्री दिखाई गई।   

अमिताभ ने सिंधुताई की साड़ी को लेकर पूछा सवाल

अमिताभ, सिंधुताई से उनकी साड़ी को लेकर सवाल पूछते हैं। तब वो कहती हैं कि मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कालापन देखा है, अब मेरे जीवन को थोड़ा गुलाबी होने दीजिए। 

तबेले में दिया बेटी को जन्म, पत्थर से काटा गर्भनाल
12 साल की उम्र में सिंधुताई की शादी 30 साल के श्रीहरी सपकाल से हो गई। वे 20 साल की उम्र में 3 बच्चों की मां बन गईं। एक बार गांववालों की मजदूरी नहीं मिलने पर सिंधुताई ने मुखिया की शिकायत जिला अधिकारी से कर दी। इस अपमान का बदला लेने के लिए मुखिया ने उनके पति श्रीहरी से कहा कि वे सिंधुताई को घर से बाहर निकाल दें। पति ने ऐसा ही किया। उस वक्त सिंधुताई गर्भवती थीं। उसी रात (14 अक्टूबर 1973) उन्होंने तबेले में एक बेटी को जन्म दिया और खुद ही पत्थर से गर्भनाल काटा।  

श्मशान में गुजारी रात 
सिंधुताई अपनी बेटी के साथ रेलवे स्टेशन पर रहने लगीं। पेट भरने के लिए भीख मांगती और रात को श्मशान में रहती थीं। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि देश में कितने अनाथ बच्चे हैं जिन्हें मां की जरूरत है। तब उन्होंने निर्णय लिया कि जो भी अनाथ उनके पास आएगा वे उसकी मां बनेंगी। 

सिंधुताई की 36 बहुएं और 272 दामाद
सिंधुताई 1200 बच्चों को गोद ले चुकी हैं। इनकी 36 बहुएं और 272 दामाद हैं। सिंधुताई कहती हैं, जिसका कोई नहीं, उसकी मां मैं हूं।

अनाथ बच्चों के लिए चलाती हैं कई संस्थाएं

सिंधुताई ने सबसे पहले दीपक नाम के बच्चे को गोद लिया था, उसे रेलवे ट्रैक पर पाया। उन्होंने अपना पहला आश्रम चिकलधारा (अमरावती, महाराष्ट्र) में खोला। वर्तमान में सिंधुताई पुणे में सन्मति बाल निकेतन, ममता बाल सदन, अमरावती में माई का आश्रम, वर्धा में अभिमान बाल भवन, गुहा में गंगाधरबाबा छात्रालय और पुणे में सप्तसिन्धु महिला आधार, बालपोषण शिक्षण संस्थान चलाती हैं। 

750 से ज्यादा पुरस्कार मिले हैं 

सिंधुताई को 750 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें 2013 में आईकॉनिक मदर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। 2016 में डीवाई पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च पुणे ने डॉक्टरेट इन लिट्रेचर से सम्मानित किया।  महाराष्ट्र सरकार ने 2010 में अहिल्याबाई होल्कर पुरस्कार दिया। 2012 में सीएनएन-आईबीएन और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा रियल हीरोज अवार्ड्स और इसी साल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे द्वारा गौरव पुरस्कार दिया गया। 2018 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया।

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