
नई दिल्ली. कई दिनों के उतार के बाद मंगलवार(7 फरवरी) गौतम अडानी (Gautam Adani) ग्रुप के शेयरों में फिर से उछाल देखने को मिला। वहीं, इस मामले को लेकर विपक्ष में 'आपसी टकराव' सामने आ गया है। ममता बनर्जी की चुप्पी ने कांग्रेस का पारा चढ़ा दिया है। बता दें कि लगातार कई दिनों की गिरावट के बाद अडानी ग्रुप के 8 शेयरों में उछाल आया है। सिर्फ 2 शेयर ऐसे हैं, जो गिरे हैं। पढ़िए पूरी डिटेल्स…
लंबी गिरावट के बाद अडानी समूह की ज्यादातर कंपनियों के शेयर मंगलवार को सुबह के कारोबार में फिर चढ़ गए। अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 15 फीसदी चढ़ने के साथ ऊपरी सर्किट सीमा को छू गया था। यानी अडानी समूह की आठ कंपनियों के शेयर चढ़े। सिर्फ 2 कंपनियों के गिरे।
अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 15 फीसदी के उछाल के साथ अपनी ऊपरी सीमा यानी 1,808.25 रुपये पर पहुंच गया। इस कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.06 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन 8.96 फीसदी की बढ़त के साथ 595 रुपये पर पहुंचा। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.28 लाख करोड़ रुपये पर था। अडानी ग्रुप की सिर्फ दो कंपनियों के शेयर टूटे। इनमें अडानी टोटल गैस 5 प्रतिशत पर निचले 1,467.50 रुपए, जबकि अडानी पावर 4.99 फीसदी गिरकर 173.35 रुपये पर आ गया।
कांग्रेस के सीनियर लीडर अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को अडानी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हो सकता है कि उन्हें ‘मामले पर चुप रहने के निर्देश मिले हों। बंगाल कांग्रेस प्रमुख ने यह भी दावा किया कि बनर्जी ऐसा कुछ भी करने को तैयार नहीं हो सकती हैं, जो अडानी समूह के हितों को नुकसान पहुंचा सके, क्योंकि समूह के पास ताजपुर बंदरगाह परियोजना कॉन्ट्रैक्ट है। बंगाल के मंत्री फिरहाद हाकिम ने भी कहा था कि अडाणी समूह के संकट का असर ताजपुर बंदरगाह परियोजना पर नहीं पड़ेगा।
मुझे लगता है कि ममता बनर्जी और अडानी के अच्छे रिश्ते हैं क्योंकि बंगाल में ताजपुर नामक एक पोर्ट बन रहा है। अडानी और मोदी जी के साथ ममता जी के रिश्ते में बदलाव आया है, इसलिए वे आजकल मोदी जी के खिलाफ भी कुछ नहीं बोलती-कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी सदन के बाहर बोले
इधर, अडानी समूह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर दोनों सदनों में तीन दिनों तक चले गतिरोध के बाद अधिकांश विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसदीय कार्यवाही में भाग लेने का फैसला किया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यह जानकारी दी। हालांकि सूत्रों ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) इस मामले में सहमत नहीं है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में हुई बैठक में 15 विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बैठक के बाद एक ट्वीट में कहा, "ज्यादातर विपक्षी दलों ने संसदीय कार्यवाही में भाग लेने का फैसला किया है। हालांकि अडानी 'महा मेगा घोटाले' में जेपीसी की अपनी मांग को उठाना जारी रखेंगे।"
बैठक में कांग्रेस के अलावा DMK, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड), AAP, CPI-M, CPI, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, नेशनल कॉन्फ्रेंस, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल कांग्रेस और विदुथलाई चिरुथिगल काची के नेता शामिल हुए।
गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह के खिलाफ अमेरिका स्थित एक्टिविस्ट शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च( US-based activist short-seller Hindenburg Research) द्वारा धोखाधड़ी वाले लेनदेन और शेयर की कीमतों में हेरफेर सहित कई आरोपों के बाद अडानी समूह के शेयर गिरने लगे थे। हालांकि कंपनी ने आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है। विपक्ष आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जांच या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर रहा है।
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