
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में इजरायल और हमास के बीच चल रही लड़ाई का असर दिख सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को इसकी आशंका है। गाजा संकट के चलते जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना है।
इस बीच पाकिस्तान लगातार घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है। स्थानीय लोगों के आतंकवाद का रास्ता अपनाने की रफ्तार कम हुई है। अब कम संख्या में युवा आतंक का रास्ता अपना रहे हैं। इसके चलते पाकिस्तान ने अधिक संख्या में आतंकियों को जम्मू-कश्मीर भेजना शुरू कर दिया है। इस साल अब तक 46 आतंकी मारे गए हैं। इनमें 37 पाकिस्तानी और 9 स्थानीय थे।
जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर हुई बैठक
श्रीनगर में बुधवार को सेना के 15 कॉर्प्स के मुख्यालय में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और गाजा संकट के संभावित असर पर चर्चा के लिए हाई लेवल बैठक हुई। इस दौरान सेना के टॉप अधिकारियों ने नए सुरक्षा मैट्रिक्स पर चर्चा की। इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि आने वाले दिनों में अगर विरोध प्रदर्शन होते हैं तो उन्हें कैसे रोका जाए। बैठक का उद्देश्य समन्वय बढ़ाना था।
नए सुरक्षा मैट्रिक्स पर किया गया विचार
सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लोग गाजा संकट पर करीब से नजर रख रहे हैं। इसके चलते इस बात की आशंका है कि आने वाले दिनों में यहां सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। इसके चलते कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। ऐसा न हो इसके लिए बैठक के दौरान नए सुरक्षा मैट्रिक्स पर विचार-विमर्श किया गया। 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से विरोध प्रदर्शन में कमी आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सफलता समन्वय से किए गए प्रयास के चलते मिली थी।
विदेशी आतंकियों पर भी बैठक में हुई चर्चा
बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर में एक्टिव विदेशी आतंकियों पर भी चर्चा हुई। घाटी में स्थानीय लोगों का आतंकी संगठनों में शामिल होना कम हो रहा है। वहीं, विदेशी आतंकियों की संख्या बढ़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में करीब 130 आतंकी घाटी में एक्टिव हैं। इनमें से आधे विदेशी हैं।
पाकिस्तान चाहता है कि जम्मू-कश्मीर आतंक की आग में जलता रहे। इसके लिए वह अधिक संख्या में अपने आतंकियों को जम्मू-कश्मीर भेज रहा है। श्रीनगर में हुई बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के सलाहकार आरआर भटनागर और उत्तरी कमान के आर्मी कमांडर उपेंद्र द्विवेदी ने की। बैठक में जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक, चिनार कोर कमांडर और सेना, राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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