
बेंगलुरु। कर्नाटक सिविल सेवा परीक्षा (Karnataka Public Service Commission examination) देने आई छात्राओं से मंगलसूत्र उतारने को कहा गया है। वहीं, हिजाब पहनकर परीक्षा देने की इजाजत दी गई। इस घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
छात्राओं से मंगलसूत्र के साथ झुमके, चेन और बिछिया समेत अन्य गहने भी उतारने को कहा गया। उनसे साफ कहा गया कि परीक्षा हॉल में जाना है तो कोई भी गहना नहीं पहन सकती। इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक बसनगौड़ा यतनाल ने सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या यह कदम "केवल हिंदुओं के लिए" है।
अधिकारियों ने हिजाब पहनने वाली महिलाओं की जांच की और जाने दिया
दरअसल, जिन छात्राओं से अपना मंगलसूत्र उतारने के लिए कहा गया था, उनमें से एक ने कहा कि अधिकारियों ने हिजाब पहनने वाली महिलाओं की भी जांच की, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी। छात्रा ने कहा, "हिंदू संस्कृति में विवाहित महिला हर वक्त मंगलसूत्र पहनती है। मुझसे मंगलसूत्र उतारने के लिए कहा गया। मैंने अपना मंगलसूत्र और पैर की अंगूठी उतार दी और अंदर चली गई। जिस तरह उन्होंने हिजाब की जांच की और अनुमति दी, उन्हें हमारी भी जांच करनी चाहिए थी हमें अंदर जाने देना चाहिए था।"
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यह घटनाक्रम केईए परीक्षा में कुछ छात्रों को नकल करते हुए पकड़े जाने के कुछ दिनों बाद आया है। केईए द्वारा विभिन्न बोर्डों और निगमों में पदों को भरने के लिए उम्मीदवारों की भर्ती की जाती है। छात्रों को परीक्षा हॉल में ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था।
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