
नई दिल्ली. रूस की कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-V का एक डोज भारत में 995.40 रुपए में पड़ेगा। इसकी कीमत तय कर दी गई है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई में इसका उत्पादन भारत में ही होने लगेगा, तब इसकी कीमतें कम होंगी। भारत में यह वैक्सीन हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड बना रही है। इस महीने के आखिर में इस वैक्सीन की 30 लाख डोज और रूस से पहुंचेंगी। भारत के पास फिलहाल तीन कोविशील्ड, कावैक्सीन और स्पुतनिक-V कोरोना वैक्सीन हैं। इस समय भारत में स्पुतनिक-V की 1.50 लाख डोज उपलब्ध हैं। इसी महीने के आखिर तक भारत को रूस से इसकी 30 लाख डोज और मिल जाएंगी।
केंद्र सरकार अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन को 250 रुपए में खरीदकर वैक्सीनेशन अभियान में इस्तेमाल कर रही है। हालांकि राज्यों और खुले बाजार में इसकी अलग कीमतें हैं। 1 मई से शुरू हुए 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के वैक्सीनेशन के मद्दनेजर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों को भी वैक्सीन खरीदने की अनुमति दी थी। अभी कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों कंपनियां अपने कुल उत्पादन का आधा केंद्र को देती हैं।
स्पुतनिक-V को इन देशों में इमरजेंसी अप्रूवल मिला
भारत के अलावा इस वैक्सीन को पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही तुर्की, चिली और अल्बानिया, रूस, बेलारूस, अर्जेंटीना, बोलीविया, सर्बिया, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, वेनेजुएला, पैराग्वे, तुर्कमेनिस्तान, हंगरी, यूएई, ईरान, रिपब्लिक ऑफ गिनी, ट्यूनीशिया, आर्मेनिया, मैक्सिको, निकारागुआ, रिपब्लिका श्रीपस्का, लेबनान, म्यांमार, पाकिस्तान, मंगोलिया, बहरीन, मोंटेनेग्रो, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, गैबॉन, सैन-मेरिनो, घाना, सीरिया, किर्गिस्तान, गुयाना, मिस्र, होरासुर, ग्वाटेमाला, मोल्दोवा, स्लोवाकिया, अंगोला, कांगो गणराज्य , जिबूती, श्रीलंका, लाओस, इराक, उत्तरी मैसेडोनिया, केन्या, मोरक्को, जॉर्डन, नामीबिया, अजरबैजान, फिलीपींस, कैमरून, सेशेल्स, मॉरीशस, वियतनाम, एंटीगुआ और बारबुडा, माली और पनामा में इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है।
1 मई से वैक्सीनेशन का महाअभियान
कोरोना संक्रमण से लोगों की सुरक्षा के लिए 1 मई से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम चल रहा है।
हाल में मिली थी स्पूतनिक-वी को मंजूरी
इस वैक्सीन को पिछले दिनों ही भारत में इमरेंसी अप्रूवल मिला था। भारत में रूस के उप राजदूत रोमन बाबुश्किन के अनुसार, भारत द्वारा स्पूतनिक वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देकर दोनों देशों के बीच स्पेशल पार्टनरशिप के नए दरवाजे खोले हैं। भारत में Sputnik V वैक्सीन बना रही डॉ रेड्डी लैब ने वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मांगी थी। रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड(RDIF) एजेंसी ने बताया कि स्पूतनिक वी कोरोना वैक्सीन को परमिशन देने वाला भारत 60वां देश है। RDIFके सीईओ किरिल दिमित्रेव (Kirill Dmitriev) ने कहा कि भारत में इस वैक्सीन की हर साल 850 मिलियन डोज बनने जा रही हैं। यह दुनियाभर के करीब 425 मिलियन लोगों के लिए पर्याप्त हैं। इस वैक्सीन के लिए 10 देशों के बीच पार्टनरशिप हुई है।
भारत में रामबाण साबित हो सकती है Sputnik V
कहा जा रहा है कि यह वैक्सीन भारत बायोटेक की Covaxin और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की Covishield से ज्यादा असरदार है। ऐसे में इस वैक्सीन से नतीजे और बेहतर मिल सकते हैं। इसके अलावा Sputnik V वैक्सीन की खास बात ये है कि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच स्टोर किया जा सकता है। इसी तरह कोविशील्ड और कोवैक्सिन को स्टोर करना भी आसान और सुविधाजनक है। Sputnik की भी दो डोज देनी पड़ेंगी।
क्या होता है इमरजेंसी अप्रूवल?
वैक्सीन, दवाओं, डायग्नोस्टिक टेस्ट्स और मेडिकल डिवाइसेज के लिए इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन लिया जाता है। भारत में इसके लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) रेगुलेटरी बॉडी है। CDSCO वैक्सीन और दवाओं के लिए उनकी सेफ्टी और असर के आकलन के बाद ऐसा अप्रूवल देता है।
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