
Arvind Kejriwal banner torned: गुजरात पर लगातार फोकस कर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का गुजरात में शनिवार को जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा। रैली को संबोधित कर रहे केजरीवाल का बैनर फाड़ दिया गया। सभा में उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। नारेबाजी करने वाले कथित बीजेपी समर्थक बताए जा रहे। BJP समर्थकों का यह विरोध दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के कथित हिंदू विरोधी बयानों को लेकर किया गया है। केजरीवाल, अपने साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर वडोदरा में एक रैली कर रहे थे। इस दौरान यह हंगामा हुआ है।
तिरंगा यात्रा के ठीक पहले विरोध और तोड़फोड़
शनिवार को दोपहर बाद आप संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित कई आप नेताओं की रैली थी। वडोदरा में आयोजित इस रैली के बाद तिरंगा यात्रा निकाला जाना था। लेकिन यात्रा के ऐन वक्त पहले हिंदूवादी संगठन के कथित कार्यकर्ता पहुंच गए और तोड़फोड़-विरोध शुरू कर दिए। यह लोग दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के कथित हिंदू विरोधी बयान से खफा थे। आप पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाते हुए इन लोगों ने जमकर हंगामा किया।
क्यों हो रहा दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का विरोध?
दिल्ली सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम बुधवार को एक बौद्ध समारोह में सम्मिलित हुए थे। जय भीम मिशन दीक्षा कार्यक्रम में दस हजार से अधिक बौद्ध अनुयायियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। मंत्री गौतम, कार्यक्रम कराने वाली संस्था जय भीम मिशन और द बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के संरक्षक हैं। खुद दिल्ली सरकार के मंत्री ने इस कार्यक्रम की जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से दी थी। मंत्री ने लिखा था कि अशोका विजयादशमी पर डॉ. अंबेडकर भवन रानी झांसी रोड पर 10,000 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने तथागत गौतम बुद्ध के धम्म में घर वापसी कर जाति विहीन व छुआछूत मुक्त भारत बनाने की शपथ ली। नमो बुद्धाय, जय भीम!।'
इस कार्यक्रम में डॉ.बीआर अंबेडकर के पड़पोते राजरत्न अंबेडकर भी शामिल हुए थे। राजरत्न अंबेडकर ने ही बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराते हुए शपथ दिलाया था। राजेंद्र पाल गौतम द्वारा दिलाए गए इन प्रतिज्ञाओं में ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित तौर पर बयान दिया गया था। वायरल वीडियो में उनमें से एक को सभा द्वारा दोहराया जा रहा है: "मुझे ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं होगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा।" उधर, गौतम ने धर्म की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल महान दलित नेता अंबेडकर द्वारा ली गई प्रतिज्ञाओं को दोहराया, जिन्होंने 1956 में इस तरह के एक कार्यक्रम में बौद्ध धर्म अपना लिया था।
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