
द्वारका. देशभर में इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर है। एक ओर जहां हिंसात्मक प्रदर्शन हुए वहीं, दूसरी तरफ बिहार में बंद बुलाया गया है। इस कानून को संविधान के खिलाफ बताकर विपक्षी पार्टियां इसका जोरदार विरोध कर रही हैं। वहीं, इन सब विरोधों के बीच एक नई तस्वीर सामने आई है। जिसमें गुजरात में पाकिस्तान से आई एक महिला को भारत की नागरिकता दे दी गई है। पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आईं हसीना बेन ने दो साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद अब उन्हें नागरिकता मिली है।
शादी के बाद चली गई थीं पाकिस्तान
भारत की रहने वालीं हसीना बेन 1999 में शादी के बाद पाकिस्तान चली गई थीं। लेकिन कुछ समय बाद उनके पति की मौत हो गई और वह फिर भारत वापस आ गईं। जिसलके बाद दो साल पहले उन्होंने भारत में नागरिकता के लिए आवेदन दिया था, अब 18 दिसंबर 2019 को भारत की ओर से उन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया गया है। गुजरात के द्वारका में हसीना बेन ने भारतीय नागरिकता लेने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। द्वारका कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा की तरफ से हसीना बेन को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया गया।
CAA का जारी है विरोध
बता दें कि भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन एक्ट का देश के कई हिस्सों में विरोध किया जा रहा है। विपक्षी पार्टियां इस बात का विरोध कर रही हैं कि ये कानून संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है और इसके साथ ही विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। विपक्ष का आरोप ये भी है कि केंद्र सरकार का ये कानून देश में अल्पसंख्यकों के प्रति भय पैदा करता है। साथ ही जामिया, नवादा, दिल्ली, बिहार, बंगाल समेत अनेक राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है।
बिहार में बुलाया गया है बंद
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बिहार में वाम दलों नें बंद बुलाया है। जिसमें आज जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं, विरोधियों ने दरभंगा में रेल रोक दिया है। कानून के खिलाफ सुबह से ही प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। दरभंगा में लेफ्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया है और ट्रेन को रोक दिया है। दरभंगा के लहेरियासराय स्टेशन पर कमला गंगा इंटरसिटी ट्रेन को रोका गया है। ट्रेन रोक कर सीपीआई-एमएल पार्टी के कार्यकर्ताओं के जरिए नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने एनआरसी के खिलाफ भी प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
क्या है सीएए
भारत सरकार ने नागरिकता कानून में बदलाव करते हुए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का नियम बनाया है। जिसमें सरकार ने तय किया है कि 2014 तक भारत में आए शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
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