
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद भारतीय सेना में महिला अधिकारियों (Women Army Officers) को स्थायी कमीशन नहीं मिल सका है। इसे लेकर 11 महिला अधिकारियों की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सेना में अभी तक महिला अधिकारियों को 50% तक स्थायी कमीशन नहीं मिला है।
जानें पूरा मामला..
सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि केंद्र सेना में कंबैट इलाकों(युद्धक्षेत्र) को छोड़कर सभी में महिलाओं को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य होगा।
बता दें कि केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 2010 में चुनौती दी थी। हालांकि इसमें हाईकोर्ट का फैसला महिला अधिकारियों के पक्ष में आया था। केंद्र का तर्क था कि सेना में पूरी यूनिट पुरुषों की हैं, ऐसे में वे महिला अधिकारियों को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन हाईकोर्ट ने केंद्र का यह तर्क खारिज कर दिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए 2019 की केंद्र सरकार की नीति का निर्णय सभी महिला अधिकारियों पर लागू होगा।
17 फरवरी, 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों के पक्ष में यह फैसला सुनाया था। बता दें कि 23 जनवरी को भारतीय सेना की 11 महिला अधिकारियों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल आशु यादव और थल सेना की 10 महिला अधिकारी शामिल थीं।
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एक महिला अधिकारी की ओर से वकील चित्रांगदा राष्ट्रवरा ने सुप्रीम कोर्ट से आदेशों को लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग उठाई थी। सेना का दावा है कि 615 महिला अधिकारियों में से 422 अधिकारियों को स्थायी कमीशन के लिए फिट पाया गया था। लेकिन वकील का तर्क है कि सिर्फ 277 को स्थायी कमीशन दिया गया। बाकी 145 अधिकारियों का रिजल्ट मेडिकल और प्रशासनिक कारणों से रोक दिया गया। 193 अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार कर दिया गया।
(File Photo)
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