ईरान में हिजाब अनिवार्य करने के खिलाफ गुस्सा, यहां SC में साड़ी से तुलना कर बैन हटाने पर अड़ीं छात्राएं

Published : Sep 20, 2022, 02:39 PM ISTUpdated : Sep 20, 2022, 02:41 PM IST
ईरान में हिजाब अनिवार्य करने के खिलाफ गुस्सा, यहां SC में साड़ी से तुलना कर बैन हटाने पर अड़ीं छात्राएं

सार

हिजाब को लेकर दुनिया के 2 देशों में अजीबो-गरीब विरोध की स्थिति पैदा हो गई है। इस्लामिक मुल्क ईरान में हिजाब को अनिवार्य किए जाने के विरोध में महिलाएं उग्र प्रदर्शन पर उतर आई हैं। भारत में हिजाब को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। पढ़िए दोनों मामले आखिर चाहते क्या हैं?

नई दिल्ली. हिजाब को लेकर मुस्लिम महिलाएं दो धड़ों में बंट गई हैं। इसे लेकर दुनिया के 2 देशों में अजीबो-गरीब विरोध की स्थिति पैदा हो गई है। इस्लामिक मुल्क ईरान में हिजाब को अनिवार्य किए जाने के विरोध में महिलाएं उग्र प्रदर्शन पर उतर आई हैं। इधर, भारत में हिजाब को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। पढ़िए दोनों मामले आखिर चाहते क्या हैं?

पहले जानते हैं भारत में हिजाब को लेकर कैसी-कैसी दलीलें दी जा रही हैं?
भारत के कर्नाटक राज्य में हिजाब (Karnataka Hijab controversy) को लेकर पिछले 10 महीने से चले आ रहे विवाद में अब कनार्टक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) में सुनवाई चल रही है। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से वकीलों ने दलील दी कि जैसे हिंदू महिला साड़ी से अपना सिर ढंकती है, वैसे हिजाब मुस्लिम महिलाओं की गरिमा का प्रतीक है।  पिटीशंस में कर्नाटक राज्य में मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब पहनने पर बैन को बरकरार रखने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

पिटीशनर्स ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने दलील देते हुए कहा कि हर कोई अलग-अलग तरीकों से सर्वशक्तिमान यानी ईश्वर को देखता है। जैसे सबरीमाला जाने वाले काले कपड़े पहनते हैं। इसे ही परंपरा कहते हैं। हर किसी को धार्मिक स्वतंत्रता का आनंद उठाने का अधिकार है।  जस्टिस गुप्ता ने कहा कि यूनिफॉर्म एक बेहतरीन लेवलर(leveler) है। एक ही कपड़े होते हैं, चाहे छात्र अमीर हो या गरीब। यानी जस्टिस गुप्ता का आशय था कि यूनिफॉर्म से कोई भेदभाव नहीं होता है। बता दें कि 15 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट की तीन मेंबर वाली बेंच ने साफ कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। यानी हाईकोर्ट ने स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनने की इजाजत देने से मना कर दिया था।

27 दिसंबर, 2021 से शुरू हुआ था ये विवाद
विवाद की शुरुआत उडुपी गवर्नमेंट कॉलेज से 27 दिसंबर, 2021 को शुरू हुई थी, जब कुछ लड़कियों को हिजाब पहनकर क्लास आने से रोका गया था। यहां के प्रिंसिपल रुद्र गौड़ा के मुताबिक, 31 दिसंबर को अचानक कुछ छात्राओं ने हिजाब पहनकर क्लास में आने की इजाजत मांगी। अनुमति नहीं मिलने पर विरोध शुरू हो गया। क्लिक करके पढ़े-, HC के फैसले के बाद 10 पॉइंट्स में जानिए हिजाब विवाद

आतंकवादी भी इस मामले में कूदे थे
हिजाब विवाद (Hijab Controversy) को लेकर कर्नाटक में बजरंग दल के 26 साल के कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के बाद यह मामला मुस्लिम कट्टरपंथियों की साजिश तक पहुंच गया। हिजाब को लेकर चल रही कंट्रोवर्सी को लेकर इंटरनेशनल आतंकी संगठन Al-Qaida लीडर अल-जवाहिरी ने हिजाब गर्ल मुस्कान के समर्थन में एक वीडियो जारी करके मामले को और विवादास्पद बना दिया था। हालांकि यह वीडियो जवाहिरी की मौत की वजह बना। इसी वीडियो से साबित हो गया था कि जवाहिरी जिंदा है। क्लिक करके पढ़ें-'हिजाब कंट्रोवर्सी' में कूदने के चक्कर में मारा गया जवाहिरी

ईरान में हिजाब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
ईरान में हिजाब को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ महिलाएं आक्रोशित हैं। हिजाब नहीं पहनने के इल्जाम में पुलिस कस्टडी में ली गई 22 साल की माहसा अमीनी की मौत के बाद जबर्दस्त विरोध खड़ा हो गया है। माहसा कुर्द मूल की थीं। बताया जाता है कि वो हिरासत में ही वे कोमा में चली गईं और 16 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से कुर्दिस्तान के शहरों के बाद राजधानी तेहरान में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। महिलाएं हिजाब को अनिवार्य की जगह वैकल्पिक करने पर अड़ी हैं। मॉरल पुलिसिंग के विरोध के बीच प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग से 5 लोगों की मौत की खबर है। 80 से ज्यादा घायल हैं। 250 से अधिक लोग अरेस्ट किए गए हैं। लोग अब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं। 83 साल के खामनेई 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे हैं। इनकी लीडरशिप में ही 1979 में इस्लामिक क्रांति हुई थी। यह भी पढ़ें-Iran Hijab Row:क्या है ईरान हिजाब विवाद, कैसे हुई शुरुआत, क्यों हो रही आलोचना? जानें सबकुछ

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