
नई दिल्ली. कर्नाटक में हिजाब (karnataka Hijab Controversy) मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। हालांकि SC ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। HC ने अंतरिम आदेश दिया है कि फैसला आने तक कोई भी छात्र धार्मिक कपड़े पहनकर स्कूल-कॉलेज नहीं जा सकेंगे। इस मामले को लेकर एक छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा छात्रा के वकीलों को नसीहत दी कि इसे राष्ट्रीय मुद्दा न बनाएं। सही समय आने पर सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वो कर्नाटक मामले में नजर बनाए हुए है और फिलहाल हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है।
10 फरवरी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया था अंतरिम आदेश
हिजाब को लेकर देश भर में चल रहे हंगामे के बीच कॉलेज से कोर्ट पहुंचा मामला गुरुवार को भी सुलझ नहीं पाया। कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High court) के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस कृष्णा एम खाजी की पीठ में मामले की सुनवाई हुई। दोपहर ढाई बजे से लेकर शाम 5 बजे तक छात्राओं के वकील देवदत्त कामत और संजय हेगड़े ने एक के बाद एक तमाम दलीलें पेश कीं। दोनों वकीलों ने कहा कि अदालत छात्रों का हित देखते हुए सुनवाई के दौरान कॉलेज खोलने का अंतरिम आदेश जारी करे। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम स्कूल-कॉलेज खोलने का आदेश जारी कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान धार्मिक परिधान पहनने की छूट किसी को भी नहीं होगी। चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम अमन-चैन चाहते हैं। कोर्ट ने छात्राओं के वकीलों की दलीलों को दरकिनार करते हुए अंतरिम आदेश दिया कि मामले पर फैसला आने तक कोई भी छात्र धार्मिक कपड़े पहनकर स्कूल-कॉलेज नहीं जा सकेंगे। हम सभी को धार्मिक कपड़े पहनने से रोक रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई सोमवार 14 फरवरी 2022 को होगी।
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ऐसे शुरू हुआ विवाद
कर्नाटक के कई कॉलेजों में हिजाब पहनकर आने वालीं लड़कियों को कॉलेज में एंट्री नहीं दी जा रही है। वहीं, हिजाब के जवाब में हिंदू लड़कियां केसरिया दुपट्टा पहनकर आने लगी हैं। विवाद की शुरुआत उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी, जहां जनवरी में हिजाब पर बैन लगा दिया था। इस मामले के बाद उडुपी के ही भंडारकर कॉलेज में भी ऐसा ही किया गया। अब यह बैन शिवमोगा जिले के भद्रवती कॉलेज से लेकर तमाम कॉलेज तक फैल गया है। इस मामले को लेकर रेशम फारूक नाम की एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट याचिका दायर की है। इसमें कहा गया कि हिजाब पहनने की अनुमति न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का हनन है। गुरुवार को भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी छात्राओं को कॉलेज के प्रिंसिपल ने अंदर नहीं आने दिया था। उनका तर्क था कि शासन के आदेश व कालेज के दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें कक्षाओं में यूनिफॉर्म में आना होगा। जबकि छात्राओं का तर्क था कि वे लंबे समय से हिजाब पहनकर ही कॉलेज आती रही हैं।
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सोमवार से शुरू होगी पढ़ाई
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने घोषणा की है कि सोमवार से स्कूलो में 9वीं और 10वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि प्री यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेज अगले आदेश तक बंद रहेंगे। कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि शिक्षण संस्थान में छात्रों को कोई भी धार्मिक कपड़े नहीं पहनने चाहिए। दरअसल, राज्य में हिजाब विवाद बढ़ने के बाद पिछले दिनों स्कूल और कॉलेजों को बंद कर दिया गया था। इस विवाद के चलते राज्य में कई जगह उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे।
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