
Arpita Mukherjee: बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 14 दिन की हिरासत में भेज दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों को अलग-अलग जेलों में रखा गया है। पार्थ चटर्जी को जहां कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल की 2 नंबर सेल में रखा गया है। वहीं, अर्पिता मुखर्जी को अलीपुर की महिला जेल में रखा गया है। बता दें कि अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग घरों से ईडी को 50 करोड़ कैश के अलावा 4 करोड़ का सोना मिला था।
जेल में कदम रखते ही निकले अर्पिता के आंसू :
अलीपुर की महिला जेल में कदम रखते ही अर्पिता मुखर्जी के आंसू निकल गए। जेल में जाते ही अर्पिता रोने लगी। हालांकि, अर्पिता को उस सेल में रखा गया है, जहां कैदियों का बर्ताव अच्छा है। जेल में पहले ही दिन अर्पिता ने खाना खाने से मना कर दिया। बता दें कि अर्पिता के वकील ने कोर्ट में कहा था कि उनकी क्लाइंट को जान का खतरा है, ऐसे में उन्हें उस जगह रखा जाए जहां कैदियों का व्यवहार अच्छा हो। इतना ही नहीं, अर्पिता को दिए जाने वाले खाने की भी जांच होनी चाहिए।
जमीन पर चटाई बिछा कर सो रहे पार्थ :
वहीं प्रेसीडेंसी पार्थ चटर्जी को प्रेसीडेंसी जेल में रखा गया है। जेल सूत्रों के मुताबिक, पार्थ को जिस ब्लाक में रखा गया है, वहां पहले से ही 150 हाईप्रोफाइल कैदी हैं। पार्थ के बगल वाली सेल में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हमला करने वाला आतंकी आफताब अंसारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्थ को पलंग नहीं मिला है, ऐसे में उन्हें जमीन पर चटाई में सोना पड़ रहा है। जेल में पहली रात पार्थ को दाल, रोटी और सब्जी दी गई।
आम कैदियों की तरह हो रहा व्यवहार :
रात को खाना खाने के बाद पार्थ ने दवाई खाई। इसके बाद अगले दिन यानी शनिवार सुबह को उन्हें नाश्ते में दूसरे कैदियों की तरह चाय और टोस्ट दिया गया। पार्थ के परिवार को जेल में उनसे मिलने की इजाजत दी गई है। वो चाहें तो पार्थ के लिए घर से खाना और कपड़ा दे सकते हैं। पार्थ को जिस सेल में रखा गया है वहां कमोड सिक्योरिटी है।
क्या है बंगाल का शिक्षक भर्ती घोटाला?
- 2016 में पश्चिम बंगाल के स्कूल सेवा आयोग (SSC) ने 13 हजार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक परीक्षा आयोजित की थी। - इस परीक्षा का रिजल्ट 27 नवंबर, 2017 को आया। रिजल्ट आने के बाद मेरिट लिस्ट बनाई गई, जिसमें सिलीगुड़ी की बबीता सरकार 77 अंक के साथ टॉप 20 में शामिल थी।
- लेकिन बाद में आयोग ने इस मेरिट लिस्ट को कैंसिल कर दिया और इसकी जगह दूसरी लिस्ट तैयार की। इस लिस्ट में बबीता सरकार का नाम वेटिंग में था।
- वहीं बबीता से कम नंबर पाने वाली अंकिता अधिकारी का नाम टॉप पर था। अंकिता तृणमूल कांग्रेस के एक मंत्री परेश अधिकारी की बेटी है, इसलिए उसे नौकरी मिल गई।
- इसके बाद बबीता सरकार और कुछ लोगों ने मिलकर इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। इस पर कोर्ट ने कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की।
- इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इसमें सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। उस दौरान टीएमसी के मंत्री परेश अधिकारी से पूछताछ भी हुई थी। हाईकोर्ट ने अंकिता की नौकरी को अवैध बताते हुए उससे वेतन वसूलने के आदेश दिए थे।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अंकिता अधिकारी की जगह बबीता सरकार को नौकरी दी जाए। बाद में इस शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़ी संख्या में पैसों के हेरफेर और गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद इसमें केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की एंट्री हुई।
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