
नई दिल्ली। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से मांग किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण कर दे। उग्र विरोध प्रदर्शनों के चलते पिछले साल शेख हसीना को पीएम पद छोड़ना पड़ा था। वह जान बचाने के लिए भारत आ गईं थीं। उन्हें किसी देश ने अब तक शरण नहीं दी है। वह भारत में रह रहीं हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारत ने शेख हसीना का वीजा बढ़ा दिया है। वह पिछले साल अगस्त से भारत में रह रहीं हैं। वीजा बढ़ाने के फैसले से भारत ने यूनुस की सरकार को साफ संदेश दे दिया है। भारत ने यह कदम तब उठाया है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग बढ़ रही है। शेख हसीना 5 अगस्त को बांग्लादेश की वायुसेना के विमान में सवार होकर हिंडन एयरबेस आईं थीं। वह दिल्ली में एक सेफहाउस में बेहद कड़ी सुरक्षा में रह रहीं हैं। सूत्रों ने इस दावे का खंडन किया कि हसीना को भारत में शरण दी गई है।
बता दें कि यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 23 दिसंबर को औपचारिक रूप से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की थी। बांग्लादेश के अधिकारियों ने दावा किया कि हसीना को 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लोगों के गायब होने की घटनाओं में उनकी संलिप्तता से संबंधित आरोपों का सामना करना होगा। आरोप हैं कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान 500 से अधिक लोग मारे गए थे।
मंगलवार को बांग्लादेश के इमिग्रेशन विभाग ने 97 पासपोर्ट रद्द करने की घोषणा की। इसमें हसीना का पासपोर्ट भी शामिल है। यूनुस के प्रवक्ता अबुल कलाम आजाद मजूमदार ने कहा कि 22 लोगों के पासपोर्ट लोगों को जबरन गायब करने में उनकी संलिप्तता के कारण रद्द किए गए हैं। शेख हसीना सहित 75 अन्य लोगों को जुलाई में हुई हत्याओं में शामिल पाया गया है।
शेख हसीना को लेकर भारत की स्थिति नाजुक है। शेख हसीना भारत में लंबे समय तक रहती हैं तो इससे द्विपक्षीय संबंधों को तत्काल कोई खतरा नहीं है, लेकिन बांग्लादेश की प्रत्यर्पण मांग ने स्थिति को जटिल बना दिया है। बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद सत्ता में रहे नेताओं के खिलाफ हिंसा हुई है। हत्या तक की गईं हैं। ऐसे में भारत के लिए शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेज देने का फैसला आसान नहीं है।
जानकारों के अनुसार अंतरिम सरकार में शामिल विपक्षी दलों के नेता चुनाव से पहले शेख हसीना और उनकी पार्टी पर पूरा दबाव बनाए रखने की कोशिश में है, जिससे चुनावी लाभ उठाया जा सके।
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