महिलाओं के स्थायी कमीशन को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लागू करने को दिए थे 3 महीने

Published : Jul 23, 2020, 04:54 PM IST
महिलाओं के स्थायी कमीशन को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लागू करने को दिए थे 3 महीने

सार

भारतीय सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन को केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक तौर पर मंजूरी मिल गई है। गुरुवार को सरकार की ओर से जारी किए गए स्वीकृति पत्र के बाद अब सेना में विभिन्न शीर्ष पदों पर महिलाओं की तैनाती की जा सकेगी। 

नई दिल्ली. भारतीय सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन को केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक तौर पर मंजूरी मिल गई है। गुरुवार को सरकार की ओर से जारी किए गए स्वीकृति पत्र के बाद अब सेना में विभिन्न शीर्ष पदों पर महिलाओं की तैनाती की जा सकेगी। इस आदेश के मुताबिक, शॉर्ट सर्विस कमिशन (SSC) की महिला अधिकारियों को भारतीय सेना के सभी दस हिस्सों में स्थायी कमीशन की इजाजत दे दी गई है।

रक्षा मंत्रालय की इस मंजूरी के मुताबिक, अब आर्मी एअर डिफेंस, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कॉर्प्स में भी स्थायी कमीशन मिल पाएगा। इसके साथ-साथ जज एंड एडवोकेट जनरल, आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स में भी ये सुविधा मिल सकेगी।

जल्द होगी महिला अफसरों की तैनाती

इस आदेश के बाद अब जल्द ही परमानेंट कमीशन सेलेक्शन बोर्ड की ओर से महिला अफसरों की तैनाती हो सकेगी। इसके लिए सेना मुख्यालय की ओर से कई अन्य ऐक्शन लिए गए हैं। सेलेक्शन बोर्ड की ओर से सभी SSC महिलाओं की ओर से ऑप्शन और सभी कागजी कार्रवाई पूरी होने पर ऐक्शन शुरू किया जाएगा। हालांकि, ये नियुक्ति कॉम्बेक्ट ऑपरेशन में नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में इसे अलग रखा था।

सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना सभी महिला अधिकारियों को देश की सेवा करने का मौका देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस स्थायी कमीशन को लेकर काफी वक्त से मांग की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई थी, जहां अदालत की ओर से केंद्र को फटकार लगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस कमीशन को बनाने के लिए सरकार को 3 महीने का वक्त दिया था। अदालत की ओर से फरवरी महीने में इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सभी नागरिकों को अवसर की समानता, लैंगिक न्याय सेना में महिलाओं की भागीदारी का मार्गदर्शन करेगा।

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