SC वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा- भारत की नागरिक नहीं हैं सोनिया गांधी

Published : Sep 19, 2024, 02:49 PM ISTUpdated : Sep 19, 2024, 03:05 PM IST
Vishnu Jain

सार

सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'भारतीय नागरिक' बताया है। जैन ने यह बात आरजे रौनक के पॉडकास्ट में कही। 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के आधिकारिक प्रवक्ता विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) पर तीखा हमला किया है। विष्णु शंकर जैन ने कहा, "सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं हैं, बल्कि भारतीय नागरिक हैं।" उन्होंने ये बातें आरजे रौनक द्वारा होस्ट किए गए रौनक पॉडकास्ट के एपिसोड में की।

विष्णु शंकर जैन ने पवित्र धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों से जुड़े कई मामलों में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व किया है। वे बाबरी मस्जिद (अयोध्या), ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी), ताजमहल (आगरा) और कुतुब मीनार (नई दिल्ली) को लेकर हुई कानूनी लड़ाई में शामिल हुए हैं।

जैन ने कहा कि उनके पिता हरिशंकर जैन का सोनिया गांधी के खिलाफ चुनावी अभियान सत्ता की चाहत नहीं था। वह "भारत के नागरिक" के रूप में उनकी स्थिति को चुनौती देना चाहते थे। उस समय वह 14 साल के थे। उन्होंने कहा, "मेरे पिता जीतने के लिए नहीं लड़े थे। उन्होंने एक बात साबित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी कि सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं। इसी बात ने सारा अंतर पैदा कर दिया।"

 

 

सोनिया गांधी के खिलाफ मेरे पिता ने चुनाव हारने के लिए लड़ा: विष्णु शंकर जैन

विष्णु शंकर जैन ने कहा, "मेरे पिता ने 1999 में सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव जीतने के लिए नहीं हारने के लिए लड़ी थी। उनका उद्देश्य यह साबित करना था कि वह भारत की नागरिक नहीं हैं। मैं तब बहुत छोटा था। मैं उनके साथ कोर्ट आया करता था। मैं 14 साल का था। अपनी आंखों से पूरी सुनवाई देखी है। तर्क ये हैं भारत में चुनाव लड़ने के लिए योग्यता भारत का नागरिक होना है। इसका मतलब है कि जो आदमी यहां पैदा हुआ है। इस जमीन का है। वही यहां पर चुनाव लड़ सकता है और इस देश के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले सकता है। संवैधानिक पद पा सकता है। जो लोग नागरिकता लेते हैं वे भारत के नागरिक नहीं हैं। वे भारतीय नागरिक हैं।"

जैन ने कहा, "मेरे पिता ने सुप्रीम कोर्ट के जज रमेश चंद्र लाहोटी से कहा था कि मैं यहां पर कुछ मांगने नहीं आया हूं। मैं वो दिन नहीं देखता चाहता हूं कि एक दिन ऐसा हो सकता है कि बेनजीर भुट्टो भारत आएंगी, यहां पर किसी से शादी करेंगी और पूरे देश को, कश्मीर को पाकिस्तान को दे देंगी। उस दिन पूछा जाएगा कि इस देश की न्यायपालिका ने सही समय पर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया।"

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