
नई दिल्ली। जांच एजेंसियों (Investigating agencies) के प्रमुखों (Chiefs) के कार्यकाल पर बवाल बढ़ता दिख रहा है। केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले के खिलाफ तीन-तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल हो चुकी हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC), सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर एडवोकेट के अलावा अब कांग्रेस (Congress) भी एपेक्स कोर्ट पहुंची है। कोर्ट से अध्यादेशों को रद्द करने की मांग की गई है। कहा गया है कि सरकार के नए आदेशों से जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता नष्ट हो जाएगी और इनका गलत इस्तेमाल होने लगेगा।
कांग्रेस ने कहा: एजेंसियां की स्वतंत्रता होगी प्रभावित
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surajewala) ने कहा कि ये अध्यादेश भारत सरकार (GOI) को ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के निदेशकों के कार्यकाल के लिए एक-एक साल के लिए टुकड़े-टुकड़े के रूप में विस्तार प्रदान करने का अधिकार देने के साथ उनकी स्वतंत्रता पर पहरा बिठाने वाला है। इनमें सार्वजनिक हित कम सरकार की हित अधिक है। वास्तव में ये सरकार की व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है। इसका प्रत्यक्ष और स्पष्ट प्रभाव जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को नष्ट करने का है।
सरकार की मंशा पर उठने लगे सवाल
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने जांच एजेंसियों के प्रमुखों के कार्यकाल के संबंध में जो अध्यादेश लाया है, उससे जांच एजेंसियों पर कार्यपालिका के नियंत्रण की पुष्टि होती है। यह उनके स्वतंत्र कामकाज को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
अंतरिम राहत की भी मांग
याचिका दायर करने के साथ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की भी मांग की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अध्यादेश ऐसे संस्थानों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जारी अदालती आदेशों का उल्लंघन करते हैं और अधिकारियों की ओर से सत्ता के स्पष्ट दुरुपयोग को भी दर्शाते हैं।
दो याचिका पहले भी दाखिल की जा चुकी हैं
इस मामले में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के साथ तीसरी याचिका है। सबसे पहली याचिका तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) की ओर से दाखिल की गई थी। तृणमूल कांग्रेस की नेता और सांसद महुआ मोइत्रा (Mohua Moitra) ने याचिका दाखिल की थी। उनके बाद सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एमएल शर्मा (ML Sharma) ने भी केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ याचिका दाखिल की।
क्या है नया आदेश?
रविवार को केंद्र सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों का कार्यकाल को लेकर बड़ा आदेश जारी किया। इस अध्यादेश के बाद केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों का कार्यकाल दो साल का होता था, जिसे अध्यादेश के बाद पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्हें एक-एक साल के तीन एक्सटेंशन दिए जा सकते हैं।
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