
नई दिल्ली। जादवपुर यूनिवर्सिटी माउंटेनियरिंग एंड हाइकिंग क्लब (JUMHC) के छात्रों की एक छोटी सी टीम ने माउंट लियो पुर्गिल की चोटी पर पहुंचकर शानदार उपलब्धि हासिल की है। इस चोटी की ऊंचाई 6792 मीटर है। शेरपाओं की मदद लिए बिना छात्रों ने यह कामयाबी पाई और माउंट लियो पुर्गिल की चोटी पर तिरंगा लहराकर इतिहास रचा। छात्र 17 जून को चोटी पर पहुंचे थे।
अनुभवी पर्वतारोही गौतम दत्ता ने इस अभियान में छात्रों का नेतृत्व किया। माउंट लियो पुर्गिल पर पहली आधिकारिक चढ़ाई 1971 में हुई थी। उस वक्त भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बहादुर जवानों ने चोटी पर विजय प्राप्त की थी। 1991 में ई. थियोफिलस ने इस चोटी पर दूसरी चढ़ाई की थी। माउंट लियो पुर्गिल को रेओ पुर्गिल या लियो पार्गियल के नाम से भी जाना जाता है। यह पश्चिमी हिमालय के जांस्कर रेंज के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यह पर्वत हिमाचल प्रदेश, तिब्बत और चीन के बीच की सीमा पर फैली हुई है।
छात्रों ने पहाड़ की चढ़ाई के लिए नहीं ली शेरपाओं की मदद
एवरेस्ट जैसी ऊंची चोटियों की चढ़ाई के लिए पर्वतारोही शेरपाओं की मदद लेते हैं। शेरपा हिमालय पर्वत पर रहने वाले लोग हैं। वे पर्वतारोहियों के साथ उनका सामान लेकर चलते हैं। वे पहाड़ की चढ़ाई के दौरान पर्वतारोहियों की मदद करते हैं। JUMHC की टीम ने अपने असाधारण पर्वतारोहण कौशल और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते हुए शेरपाओं की मदद लिए बिना चढ़ाई की।
JUMHC की पर्वतारोहण की दुनिया में एक लंबी विरासत है। इसके छात्र 1978 पहाड़ों की चढ़ाई कर रहे हैं। 1980 में JUMHC के छात्रों ने जोगिन समूह की चोटियों की चढ़ाई की थी। इसमें जोगिन II की पहली चढ़ाई भी शामिल है। यह चोटी 6342 मीटर ऊंची है।
बेहद कठिन है माउंट लियो पुर्गिल
गौरतलब है कि माउंट लियो पुर्गिल की चढ़ाई बेहद कठिन है। यह बर्फ से ढ़ंकी हुई है। इस चोटी की चढ़ाई करने वालों को अत्याधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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