
नई दिल्ली। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित (Uday Umesh Lalit) को बुधवार को भारत का 49वां प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर किए। वह 27 अगस्त को पदभार ग्रहण करेंगे। जस्टिस यू यू ललित का भारत की न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में संक्षिप्त कार्यकाल होगा।
लगभग तीन महीने तक वह CJI के रूप में काम करेंगे और 8 नवंबर 2022 को पद छोड़ देंगे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। वहीं, हाईकोर्ट के जज की रिटायर होने की उम्र 62 साल है। जस्टिस ललित दूसरे CJI होंगे, जिन्हें बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट बेंच में प्रोन्नत किया गया था। जस्टिस एस एम सीकरी मार्च 1964 में सीधे शीर्ष अदालत की बेंच में पदोन्नत होने वाले पहले वकील थे। सीकरी जनवरी 1971 में 13वें CJI बने थे।
27 अगस्त 2022 से प्रभावी होगी नियुक्ति
कानून मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के जज उदय उमेश ललित को भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 27 अगस्त 2022 से प्रभावी होगी। न्यायमूर्ति ललित कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं, इसमें मुसलमानों के बीच तत्काल ट्रिपल तालक के जरिए तलाक की प्रथा को अवैध और असंवैधानिक माना जाना भी शामिल है।
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ललित प्रसिद्ध वकील रहे हैं। उन्हें 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। उन्होंने जनवरी 1986 से वकील के रूप में दिल्ली में प्रैक्टिस किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अप्रैल 2004 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया था। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुनवाई के लिए उन्हें सीबीआई का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।
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