क्या है अग्निपथ स्कीम?, पीएम ने बताया क्यों लिया ये फैसला, विपक्ष को खूब सुनाया

Published : Jul 26, 2024, 01:12 PM ISTUpdated : Jul 26, 2024, 01:14 PM IST
Narendra Modi Speech on Agnipath Scheme

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के अवसर पर अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) को लेकर विपक्ष पर जमकर हमला किया। उन्होंने बताया कि इस योजना को क्यों लाया गया है। 

द्रास। कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के अवसर पर द्रास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल युद्ध स्मारक जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) क्यों लाई गई। इसका मकसद क्या है? उन्होंने इस योजना पर राजनीति करने के लिए विपक्ष को जमकर सुनाया।

नरेंद्र मोदी ने कहा, "डिफेंस सेक्टर में रिफॉर्म के लिए भारत की सेनाओं की सराहना करता हूं। हमारी सेनाओं ने बीते वर्षों में कई साहसिक निर्णय लिए हैं। सेना द्वारा किए गए जरूरी रिफॉर्म का एक उदाहरण अग्निपथ योजना है। दशकों तक संसद से लेकर अनेक कमेटी तक में सेनाओं को युवा बनाने पर चर्चाएं होती रहीं। भारत के सैनिकों की औसत आयु ग्लोबल एवरेज से ज्यादा होना, हम सबकी चिंता बढ़ाता रहा है।"

मोदी बोले- हमारे लिए सेना का मतलब 140 करोड़ देशवासियों की सुरक्षा की गारंटी

पीएम ने कहा, "यह विषय वर्षों तक अनेक कमेटियों में उठा, लेकिन देश की सुरक्षा से जुड़ी इस चुनौती के समाधान की पहले इच्छा शक्ति नहीं दिखाई दी। शायद कुछ लोगों की मानसिकता ऐसी थी कि सेना मतलब नेताओं को सलाम करना, परेड करना। हमारे लिए सेना मतलब 140 करोड़ देशवासियों की आस्था, देशवासियों की शांति और सीमाओं की सुरक्षा की गारंटी है।

सेनाओं को युवा बनाना है अग्निपथ योजना का लक्ष्य

पीएम मोदी ने कहा, "अग्निपथ योजना के जरिए देश ने इस महत्वपूर्ण सपने को संबोधित किया है। अग्निपथ योजना का लक्ष्य सेनाओं को युवा बनाना है। अग्निपथ का लक्ष्य सेनाओं को युद्ध के लिए निरंतर योग्य बनाए रखना है। दुर्भाग्य से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील विषय को लोगों ने राजनीति का विषय बना दिया। कुछ लोग सेना के रिफॉर्म पर अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में झूठ की राजनीति कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने हजारों करोड़ के घोटाले कर हमारी सेनाओं को कमजोर किया है। ये वही लोग हैं जो चाहते थे कि एयरफोर्स को कभी आधुनिक फाइटर जेट नहीं मिल पाए। ये वही लोग हैं, जिन्होंने तेजस फाइटर प्लेन को भी डिब्बे में बंद करने की तैयारी कर ली थी।"

अग्निपथ योजना से देश की ताकत बढ़ेगी

नरेंद्र मोदी ने कहा, "सच्चाई यह है कि अग्निपथ योजना से देश की ताकत बढ़ेगी। देश का सामर्थ्यवान युवा भी मातृभूमि की सेवा के लिए आगे आ रहा है। प्राइवेट सेक्टर और पैरामिलिट्री फोर्सेज में भी अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। मैं तो हैरान हूं कि कुछ लोगों की समझ को क्या हुआ है, उनकी सोच को क्या हो चुका है। ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि सरकार पेंशन के पैसे बचाने के लिए ये योजना लेकर आई है। मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहता हूं। कोई मुझे बताए। आज मोदी के शासनकाल में जो भर्ती होगा आज उसे पेंशन मिलेगी क्या? उसको पेंशन देने की नौबत 30 साल बाद आएगी, तब तक मोदी 105 साल का हो जाएगा। क्या मोदी ऐसा नेता है जो 105 साल का होने पर जो पेंशन बचेगा उसके लिए आज गाली खाएगा? क्या तर्क दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जो लोग देश के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, इतिहास साक्षी है कि उन्हें सैनिकों की कोई परवाह नहीं है। ये वही लोग हैं जिन्होंने 500 करोड़ रुपए दिखाकर वन रैंक वन पेंशन पर झूठ बोला था। ये हमारी सरकार है जिसने वन रैंक वन पेंशन लागू किया, पूर्व सैनिकों को सवा लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए। ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के 7 दशक बाद भी शहीदों के लिए वॉर मेमोरियल नहीं बनाया। ये वही लोग हैं जिन्होंने सीमा पर तैनात हमारे जवानों को पर्याप्त बुलेटप्रूफ जैकेट्स भी नहीं दी थीं।"

क्या है अग्निपथ योजना?

नरेंद्र मोदी की सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ योजना घोषित किया था। इसके तहत तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) में अधिकारी रैंक से नीचे के जवानों की भर्ती होती है। जवानों को चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। इन्हें अग्निवीर कहा जाता है। इनमें से 25% तक 'अग्निवीर', योग्यता और सेना की जरूरत के अनुसार स्थायी कमीशन (अन्य 15 वर्ष) पर सेनाओं में शामिल हो सकते हैं। बाकी के 75% को चार साल की सेवा के बाद बाहर जाना होगा।

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अग्निवीरों को 30,000-40,000 रुपए प्रति माह का मूल वेतन मिलता है। इसके साथ ही उन्हें अन्य जोखिम और कठिनाई भत्ते भी मिलते हैं। मासिक वेतन का 30% सेवा निधि कोष में जमा होता है। इसमे सरकार भी बराबर हिस्सा देती है। सेवा के अंत में उन्हें इस कोष से एकमुश्त करीब 11.71 लाख रुपए (ब्याज सहित) मिलते हैं।

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