महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! कर्नाटक में पीरियड लीव को मिली मंजूरी, जानिए क्या है इस पर पुरुषों का रिएक्शन?

Published : Oct 11, 2025, 07:44 AM IST
Period Leave Is Official In Karnataka

सार

Period Leave Is Official In Karnataka: कर्नाटक सरकार ने पीरियड लीव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इसे महिलाओं के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि पुरुष इस फैसले को लेकर क्या सोचते हैं?

Period Leave Is Official In Karnataka: कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के लिए हर महीने एक दिन पीरियड लीव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिससे कई महिलाओं को इस दौरान आराम और राहत मिल सकेगी। जहां राज्यभर की महिलाएं इस फैसले का स्वागत कर रही हैं, वहीं ऑफिसों और सोशल मीडिया पर इस पर बहस भी शुरू हो गई है। आइए जानते हैं कि पुरुष इस पीरियड लीव को लेकर वास्तव में क्या सोचते हैं।

इस फैसले के बारे में क्या सोचते हैं पुरुष?

गुरुग्राम के रहने वाले 25 साल के कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हरप्रतीक कहते हैं कि मैं इस फैसले के पूरी तरह समर्थक हूं। उन्होंने कहा, च कहूं तो इसे बहुत पहले लागू किया जाना चाहिए था। जब लोग देखते हैं कि सरकार पीरियड के दर्द को मान्यता देकर छुट्टी दे रही है, तो इससे यह संदेश जाता है कि यह मामूली या शर्मनाक बात नहीं है।" कुछ लोगों ने का कि महिलाओं के लिए यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इसके बावजूद कईयों में हिचकिचाहट है। कई महिलाएं डरती हैं कि छुट्टी लेने पर उन्हें कमजोर या कम मेहनत करने वाला समझा जा सकता है। इसके अलावा, कुछ कंपनियों को यह भी चिंता है कि अतिरिक्त 12 दिन की छुट्टी किसी कर्मचारी के लिए जोखिम बन सकती है।

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किन राज्यों में मिलता है पीरियड लीव? 

मासिक धर्म अवकाश के नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई थी। समिति ने सुझाव दिया था कि महिलाओं को हर महीने 6 दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए। लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर सालाना 12 दिन का अवकाश देने का फैसला किया है। श्रम मंत्री ने कहा कि यह छुट्टी सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में लागू होगी। भारत में मासिक धर्म अवकाश की शुरुआत सबसे पहले 1992 में बिहार में हुई थी। बिहार देश का पहला राज्य है जिसने महिलाओं को हर महीने दो दिन की छुट्टी दी। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य भी कुछ नियमों के साथ महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश देते हैं।

लेकिन सिर्फ छुट्टी देना ही काफी नहीं है। असली बदलाव तब होगा जब ऑफिस और पुरुष कर्मचारी इसे समझें और महिलाओं के प्रति सहानुभूति दिखाएं। ऑफिस में ऐसा माहौल होना चाहिए जिसमें किसी महिला को अपने पीरियड के लिए माफी मांगने की जरूरत न लगे।

 

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