
मुंबई. कर्नाटक की राजनीति में 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद से राजनीतिक उबाल मचा हुआ है। अब इस्तीफा स्वीकार नहीं करने पर बागी विधायक विधानसभा स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने स्पीकर के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा- विधानसभा स्पीकर अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे जानबूझकर इस्तीफे की स्वीकृति में देरी लगा रहे हैं। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।
विधानसभा स्पीकर ने कहा- इस्तीफे कानूनी तौर पर सही नहीं
विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने मंगलवार को विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए थे। उन्होंने कहा था- 13 में से 8 विधायक के इस्तीफे कानूनी तौर पर सही नहीं है। राज्यपाल को इससे जुड़ी जानकारी सौंप दी गई है। किसी भी बागी विधायक ने मुझसे मुलाकात नहीं की। मैंने राज्यपाल को भरोसा दिलाया है कि मैं संविधान के तहत काम करूंगा। जिन पांच विधायकों के इस्तीफे ठीक हैं उनमें से मैंने 3 विधायकों को 12 जुलाई और 2 विधायकों को 15 जुलाई को मिलने का वक्त दिया है।
कांग्रेस- जेडीएस गठबंधन के 13 विधायकों ने दिया इस्तीफा
कांग्रेस के 11 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। जिसमें उमेश कामतल्ली, बीसी पाटिल, रमेश जारकिहोली, शिवाराम हेब्बर, एच विश्वनाथ, गोपालैया, बी बस्वराज, नारायण गौड़ा, मुनिरत्ना, एसटी सोमाशेखरा, प्रताप गोड़ा पाटिल, मुनिरत्ना और आनंद सिंह शामिल हैं। वहीं कांग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बैग ने भी मंगलवार को इस्तीफा सौंप दिया है।
इस्तीफे हुए स्वीकार तो अल्पमत में आ जाएगी सरकार
कर्नाटक के राजनैतिक समीकरण की बात करें तो अगर 14 बागी विधायकों के स्वीकार होते हैं तो विधानसभा में कुल 210 सदस्य रह जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर ये संख्या भी 209 हो जाएगी। ऐसे में बहुमत के लिए 105 विधायकों की जरुरत है। कुमार स्वामी के पास सिर्फ 102 विधायकों का समर्थन रह जाएगा। ऐसे में सरकार अल्पमत में आ जाएगी।
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