
नई दिल्ली। विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) सोमवार को पहली बार लोकसभा में बोले। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए, लेकिन मोदी सरकार पर हमलों की बौछार कर दी। उन्होंने सारे नियम-कायदे ताक कर रख दिए। केंद्र सरकार के मंत्र बीच में टोक-टोककर बताते रहे कि राहुल गांधी गलत बोल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस नेता ने कोई परवाह नहीं की। उन्हें जो बोलना था बोलते रहे।
राहुल गांधी के कई बयानों को संसद के रिकॉर्ड से हटाया गया है। राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर इसपर आपत्ति जताई है और मांग की है कि उनके बयान को रिकॉर्ड से नहीं हटाया जाए। राहुल गांधी ने हिंदू समाज को हिंसक कह दिया, जिसपर सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध किया गया। इसी तरह उन्होंने अग्निवीर योजना और एमएसपी को लेकर भी ऐसी बातें की, जिसपर सरकार की ओर से आपत्ति जताई गई।
संसद के रिकॉर्ड से हटाए गए राहुल गांधी के ये 6 बड़े बयान
1. "लोग खुद को हिंदू कहते हैं वे केवल हिंसा, घृणा, असत्य की बात करते हैं...आप हिंदू हैं ही नहीं...।"
2. "अयोध्या के लोग तब नाराज हो गए जब भाजपा ने राम मंदिर के उद्घाटन के लिए अडानी-अंबानी को आमंत्रित किया, लेकिन स्थानीय लोगों को नहीं।"
3. "एक अग्निवीर जवान की बारूदी सुरंग विस्फोट में मौत हुई। उसे 'शहीद' नहीं कहा गया। अग्निवीर यूज एंड थ्रो मजदूर है...।"
4. "अग्निवीर योजना का विचार भारतीय सेना से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय से आया था। यह प्रधानमंत्री के दिमाग की उपज थी।"
5. "कोटा में पूरी परीक्षा केंद्रीकृत कर दी गई है। यह व्यवस्था अमीरों को लाभ पहुंचाने के लिए की गई है।"
6. राहुल गांधी के भाषण का वह हिस्सा संसद के रिकॉर्ड से हटा दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा और आरएसएस अल्पसंख्यकों, किसानों, दलितों और पिछड़े वर्गों के खिलाफ नफरत फैलाने में लगे हुए हैं।
संसद के रिकॉर्ड से क्यों हटाए गए राहुल गांधी के बयान?
संसद में सत्र के दौरान नेता जो बयान देते हैं उसे रिकॉर्ड में रखा जाता है। अगर किसी नेता ने ऐसी बात बोली जो गलत है और संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं हो तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। संसद के रिकॉर्ड से भाषण के किसी हिस्से को हटाने या मिटाने का अधिकार सदन के पीठासीन अधिकारी के पास होता है।
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संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत सांसद संसद में जो बयान देते हैं उसके चलते उनके खिलाफ कोर्ट में कार्यवाही नहीं हो सकती। सांसद नियमों के अनुसार अपनी बात रखें इसका कंट्रोल अध्यक्ष के पास होता है। अगर सांसद गलत बोलते हैं या अनुचित व्यवहार करते हैं तो अध्यक्ष उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
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