
MUDA land scam: Karnataka के CM सिद्धारमैया (CM Siddaramaiah) को Mysuru Urban Development Authority (MUDA) Land Scam में लोकायुक्त (Lokayukta) से क्लीन चिट मिल गई है। इसके बाद राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। जहां BJP ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए इस फैसले का स्वागत किया है।
गुरुवार को लोकायुक्त ने बेंगलुरु में स्पेशल कोर्ट फॉर MLAs और MPs में 11,000 पन्नों की रिपोर्ट जमा कर दी। इस केस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी बीएम पार्वती (BM Parvathi), उनके साले मल्लिकार्जुनस्वामी और जमीन मालिक जे देवराजू (J Devaraju) के खिलाफ शिकायत थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी को मैसूरु के अपमार्केट इलाके विजयनगर लेआउट (Vijayanagar Layout) में 14 साइट्स अलॉट की गईं, जो कि केसारे गांव (Kesare Village) में 3.16 एकड़ जमीन के मुआवजे के रूप में दी गई थीं। आरोप था कि इससे सरकार को 45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पहले ही इस आरोप को गलत बताया था। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को यह प्लॉट उनके भाई ने गिफ्ट किए थे और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई।
लोकायुक्त ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं मिले, जिससे किसी आपराधिक साजिश (Criminal Charges) को साबित किया जा सके। रिपोर्ट में इसे सिविल मामला बताया गया।
लोकायुक्त की रिपोर्ट सामने आने के बाद BJP ने इस पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने कहा: हमें लोकायुक्त पर भरोसा है लेकिन इस मामले की जांच जिन पुलिस अधिकारियों ने की, उन्हें मुख्यमंत्री ने खुद ट्रांसफर और पोस्टिंग दी। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। अगर सिद्धारमैया खुद को पाक-साफ साबित करना चाहते हैं, तो उन्हें इस केस को CBI को सौंप देना चाहिए या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया था। डिप्टी CM डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने BJP पर हमला बोलते हुए कहा: मैंने पहले ही कहा था कि जब BJP और JDS ने इस मामले में प्रदर्शन किया था, तब यह एक राजनीतिक साजिश थी। इस केस में कोई सबूत नहीं मिला इसलिए इसे बंद कर दिया गया। लोकायुक्त एक स्वतंत्र संस्था है, मुख्यमंत्री का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी को आपत्ति है तो वे कोर्ट में लड़ सकते हैं। लेकिन इस मामले में कोई आपराधिक मामला बनता ही नहीं था।
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