
नई दिल्ली। TMC (Trinamool Congress) नेता महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में लोकसभा से निष्कासित किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है।
महुआ मोइत्रा को आठ दिसंबर को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। यह कार्रवाई आचार समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। मोइत्रा पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के बदले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट और पैसे लिए। मोइत्रा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
निष्कासन के बाद मोइत्रा ने कहा था कि उनके खिलाफ बिना सबूत के कार्रवाई की गई। उन्होंने आचार समिति को विपक्ष को तोड़ने वाला हथियार बताया था और आरोप लगाया था कि आचार समिति ने हर नियम को तोड़ दिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर लोकसभा सीट से चुनी गईं थीं।
क्या है 'कैश-फॉर-क्वेरी' मामला?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मोइत्रा के खिलाफ हीरानंदानी से पैसे और गिफ्ट के बदले संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। उन्होंने वकील देहाद्राई के पत्र का हवाला दिया था, जिसमें मोइत्रा और हीरानंदानी के बीच कथित लेन-देन के पक्के सबूत होने की बात की गई थी। निशिकांत दुबे की शिकायत पर लोकसभा की आचार समिति ने मामले की जांच की। समिति ने मोइत्रा से पूछताछ की।
हीरानंदानी ने आचार समिति को पत्र दिया। इसमें दावा किया गया कि मोइत्रा ने अपनी संसदीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड उनके साथ शेयर किया था ताकि वह मोइत्रा की ओर से प्रश्न पोस्ट कर सकें। मोइत्रा ने लॉगिन आईडी और पासवर्ड शेयर करना स्वीकार किया है।
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मोइत्रा 2 नवंबर को आचार समिति के सामने पेश हुईं। उन्होंने सवालों की प्रकृति को लेकर विरोध जताया और पूछताछ बीच में छोड़कर बाहर आ गईं थी। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि उनसे व्यक्तिगत सवाल पूछे गए। बाद में आचार समिति ने मोइत्रा के खिलाफ आरोपों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके कारण उन्हें लोकसभा सांसद के रूप में निष्कासित कर दिया गया।
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