
इंफाल: मणिपुर हाईकोर्ट ने गुरुवार को बेहद संवेदनशीलता और गंभीरता दिखाते हुए दंगों में मारे गए लोगों के शवों को दफनाने के मामले में सुबह छह बजे सुनवाई की। कोर्ट ने शवों के दफनाने के मामले में दोनों पक्षों के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। हाईकोर्ट की तत्परता ने गुरुवार को एक बार फिर बड़ी हिंसा से राज्य को बचा लिया। स्टे देने के साथ ही कोर्ट ने अगली तारीख 9 अगस्त को तय किया।
35 शवों को टोरबुंग में दफनाने जा रहे थे कुकी
कुकी-जो जनजातियों ने हिंसा में मारे गए 35 शवों को टोरबुंग में दफनाने की योजना बनाई थी। ये लोग मई और जून में हिंसा के दौरान मारे गए थे। जबकि घाटी में बहुसंख्यक मैतेई लोगों ने इस सामूहिक अंतिम संस्कार का विरोध किया। मैतेई समाज को अंदेशा था कि कुकी जनजाति के लोग सामूहिक अंतिम संस्कार करके अतिरिक्त जमीन पर अपना दावा करेंगे। मैतेई समाज का मानना है कि कुकी शवों को दफनाने के बाद स्मृति स्थल में बदलकर नई जमीन पर दावा करके नया विवाद पैदा करेंगे।
मैतेई समाज ने रातों-रात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कुकी समूहों द्वारा शवों को दफनाने की तैयारी के खिलाफ मैतेई समाज के लोगों ने रातों-रात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मैतेई समूहों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। यह याचिका इंटरनेशनल मेइटिस फोरम द्वारा दायर की गई थी। उधर, काफी संख्या में मैतेई गुट के लोग उस स्थल की ओर बढ़ने लगे जहां कुकी समाज ने अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रखी थीं। एक बार फिर राज्य में स्थिति बिगडने की आशंका तेज हो गई। एक तरफ मैतेई भीड़ उस जगह की ओर बढ़नी शुरू हो गई तो दूसरी ओर कुकी समाज के लोग कब्र बनाने के लिए खुदाई शुरू कर दी। स्थितियां रातों-रात बिगड़ने लगा।
लेकिन हाईकोर्ट ने सुबह ही शुरू कर दी सुनवाई
दोनों पक्षों के आमने-सामने आने और हिंसा की बढ़ती आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुबह छह बजे ही सुनवाई करना शुरू कर दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमवी मुरलीधरन ने तत्काल याचिका पर सुनवाई की और शांति बनाए रखने के लिए सुबह 6 बजे एक आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि दफन स्थल विवाद पर दोनों पक्षों में यथास्थिति बनी रहे। अदालत ने अधिकारियों को कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आदेश दिया। कोर्ट ने विवाद में शामिल सभी पक्षों से मामले को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कहा। कोर्ट ने कुकी-ज़ो जनजातियों के प्रतिनिधियों से यह भी कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर मृतकों को दफ़नाने के लिए सरकार से ज़मीन मांग सकते हैं।
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