मणिपुर में मैतेई और कुकी के बीच जातीय हिंसा में फंसे मैतेई पंगल कहे जाने वाले मुसलमान, पल-पल मांग रहे जिंदगी की दुआ

Published : Aug 12, 2023, 08:10 PM ISTUpdated : Aug 12, 2023, 08:32 PM IST
Meiteis Pangal

सार

इन दो जातीयों के बीच हिंसा और तनाव का सबसे अधिक खामियाजा यहां दोनों जिलों के बीच रहने वाले मैतेई पंगल यानी मुस्लिमों को भुगतना पड़ रहा।

Meiteis Pangals Muslims suffering: मणिपुर में जातीय हिंसा भड़के 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं। कुकी और मैतेई के बीच स्थितियां अभी तक सामान्य नहीं हो सकी हैं। मैतेई बहुल बिष्णुपुर जिला और कुकी बहुल चुराचांदपुर जिले में अभी भी बम गोलीबारी व हमले जारी है। आए दिन दोनों तरफ से हिंसा की कार्रवाई हो रही। पूरा इलाका सुरक्षा बलों के हवाले है लेकिन हिंसा दोनों जिले में जारी है। हालांकि, इन दो जातीयों के बीच हिंसा और तनाव का सबसे अधिक खामियाजा यहां दोनों जिलों के बीच रहने वाले मैतेई पंगल यानी मुस्लिमों को भुगतना पड़ रहा। दोनों तरफ से हमलों के शिकार यहां रहने वाले मुस्लिम हो रहे हैं। वह पल-पल अपनी जिंदगी की दुआ मांग रहे और दोनों तरफ शांति की अपील कर रहे।

मैतेई और कुकी हिंसा के बीच फंसे क्वाक्टा के मुसलमान

बिष्णुपुर जिला और चुराचांदपुर जिला के बीच करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर क्वाक्टा नामक जगह है। मैतेई पंगल यानी मुस्लिम रहते हैं। मैतेई पंगल, दोनों जातियों के हिंसा की वजह से हो रही गोलीबारी और बमबाजी में फंसे हुए हैं। हालांकि, क्वाक्टा एक बहुजातीय इलाका है। यहां कभी मेइतीस और कुकी पड़ोसी के रूप में रहते थे। शहर की आबादी में 90 प्रतिशत मुस्लिम हैं। लेकिन स्थितियां बदल चुकी हैं। मैतेई और कुकी एक दूसरे को मरने मारने पर तुले हुए हैं। ऐसी स्थिति में मणिपुर के मुसलमान खुद को मेइतेई और कुकी के बीच गोलीबारी में असहाय रूप से फंसा हुआ पाते हैं। क्वाक्टा में उनकी आजीविका बर्बाद हो चुकी है।

क्वाक्टा के मुस्लिम बुद्धिजीवी नासिर खान कहते हैं कि क्वाक्टा में लोग दहशत में जी रहे हैं। खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। हिंसा की वजह से यहां के लोगों की आजीविका बर्बाद हो चुकी है। छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल व शिक्षण संस्थान, बमबारी की वजह से ध्वस्त हो चुके हैं।

दोनों पड़ोसियों से शांति की कर रहे अपील

मणिपुर की अनुमानित 32 लाख की आबादी है। यहां मैतेई और कुकी बहुलता है। लेकिन राज्य में कम से कम 9 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती हैं। कुकी और मैतेई के बीच हिंसा का सबसे अधिक खामियाजा यहां के मुसलमानों को भी भुगतना पड़ रहा। यहां रहने वाले मुसलमानों के मैतेई और कुकी दोनों पड़ोसी हैं। अब यहां रहने वाले मुसलमान, लगातार दोनों पड़ोसियों से शांति की अपील कर रहे हैं। मुसलमानों ने अपने कूकी और मैतेई पड़ोसियों से लड़ाई बंद करने की अपील की है। एक स्थानीय मुस्लिम नेता हाजी रफत अली ने कहा हम मैतेई पंगल एक अल्पसंख्यक समुदाय हैं। नेपालियों और अन्य लोगों की तरह, हम भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जीवन बाधित हो गया है। हम अपने मैतेई और कुकी भाइयों और बहनों से शांति वापस लाने की अपील करते हैं। बीते दिनों मणिपुर के मुस्लिम नेता केंद्र से अपने क्षेत्रों में अधिक सुरक्षा कवर की मांग करने के लिए दिल्ली आए थे। क्वाक्टा शहर में दोनों चुराचांदपुर और बिष्णुपुर में हिंसा की वजह से कम से कम 12 मुस्लिम घायल हो चुके हैं।

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