MHA advisory for Nation Flag: राष्ट्रीय ध्वज संहिता का करें पालन, कागज के झंडे न फाड़े जाएंगे न जमीन पर फेंके

Published : Jan 15, 2022, 06:31 PM IST
MHA advisory for Nation Flag: राष्ट्रीय ध्वज संहिता का करें पालन, कागज के झंडे न फाड़े जाएंगे न जमीन पर फेंके

सार

एडवाइजरी के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए इसे सम्मान की स्थिति में होना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के लिए सार्वभौमिक स्नेह, सम्मान और निष्ठा है।

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस (Republic day) के अवसर पर तिरंगा (Tricolor) के प्रति सम्मान के लिए गृह मंत्रालय ने एडवाइजरी (MHA Advisory) जारी की है। समारोह के बाद कागज के बने तिरंगा को जमीन पर न फेंका जाएगा न ही फाड़ा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तिरंगे का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए एक एडवाइजरी भेजी है। एडवाइजरी के अनुसार राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के अवसरों पर इवेंट के बाद जनता द्वारा लहराए गए कागज से बने राष्ट्रीय ध्वज को न तो तोड़ा जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए।

भारतीय ध्वज संहिता का कड़ाई से हो पालन

गणतंत्र दिवस समारोह से पहले एडवाइजरी में गृह मंत्रालय ने भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। एडवाइजरी के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए इसे सम्मान की स्थिति में होना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के लिए सार्वभौमिक स्नेह, सम्मान और निष्ठा है। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन पर लागू होने वाले कानूनों, प्रथाओं और सम्मेलनों के संबंध में लोगों के साथ-साथ सरकार के संगठनों/एजेंसियों के बीच जागरूकता की एक स्पष्ट कमी अक्सर देखी जाती है।

क्या है राष्ट्रीय ध्वज संहिता?

राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुसार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के अवसरों पर जनता द्वारा कागज से बने राष्ट्रीय ध्वज को लहराया जा सकता है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के अवसरों पर जनता द्वारा केवल कागज के बने झंडों का उपयोग किया जाता है। केंद्र ने कहा कि इस तरह के कागज के झंडों को आयोजन के बाद न तो फेंका जाता है और न ही जमीन पर फेंका जाता है।

कानून के मुताबिक ध्वज की गरिमा के अनुरूप इस तरह के झंडों को निजी तौर पर और निपटाया जाना चाहिए। सभी सरकारी कार्यालयों से इस संबंध में जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने का अनुरोध किया गया है।

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