
न्यू दिल्ली: शेयर बाजार में निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपियों ने निवेशकों से हड़पे गए पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दिया। पांचों आरोपियों को छह दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गिरोह ने फरीदाबाद की एक महिला से सात करोड़ रुपये से ज्यादा, नोएडा के एक कारोबारी से नौ करोड़ रुपये और पंजाब के एक डॉक्टर से छह करोड़ रुपये समेत कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। बताया जा रहा है कि ये लोग फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और कार्ड पोस्ट करके लोगों को आकर्षित करते थे। इसके बाद सुनियोजित तरीके से शिकार को अपने जाल में फंसाते थे।
फरीदाबाद की रहने वाली पीड़िता ने फेसबुक पर शेयर बाजार के जरिए आसानी से पैसा कमाने में मदद करने वाला विज्ञापन देखा। लिंक पर क्लिक करते ही उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। वहां कई लोग मोटा मुनाफा कमाने की कहानियां सुना रहे थे। हालांकि, उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि ये सभी लोग ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य हैं। ग्रुप का नाम भी एक बड़े बैंक के नाम पर था। इससे उसका विश्वास बढ़ गया।
जब वह निवेश करने को तैयार हुई तो उसे दूसरे ग्रुप में जोड़ दिया गया। यहां उसे पहले चरण में आईसी ऑर्गन मैक्स नामक ऐप इंस्टॉल करने को कहा गया। इसमें उसने 61 लाख रुपये का निवेश किया। इसके बाद उसे टेक्सटार्स डॉट शॉप नाम से एक और ऐप इंस्टॉल करने को कहा गया और उसमें भी उसने पैसे जमा किए। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उसे भारी मुनाफा होता गया। हालांकि, यह सब ऐप में उसके अकाउंट में दिखने वाले आंकड़े भर थे। हर दिन उसके खाते में मोटी रकम जमा होती रहती थी। लेकिन जब वह इसे निकालने की कोशिश करती तो दिक्कत आती। पैसे नहीं निकलते थे।
पैसे निकालने की कोशिश करने पर कुछ टैक्स, ब्रोकरेज फीस और कुछ अन्य शुल्क मांगे जाते हैं। यह भी लोगों से और पैसे ऐंठने का एक तरीका है। जब तक यह सब होता है, तब तक ये लोग सभी माध्यमों से संपर्क तोड़ देते हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पाता है। ज्यादा से ज्यादा पैसे ऐंठने के बाद वे पीड़ितों को छोड़कर दूसरे शिकार की तलाश में निकल जाते हैं। ठगी का शिकार हुए सभी लोगों का लगभग यही अनुभव है।
गिरफ्तारी के बाद ईडी अधिकारियों ने आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच टीम को 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी के सबूत मिले हैं। आरोपियों ने पांच लाख रुपये से कम के लेन-देन सिर्फ अकाउंट के जरिए किए। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजते थे।
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