
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 9 साल के कार्यकाल में 24.82 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले है। यह रिपोर्ट नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेशचंद्र ने नीति आयोग के अध्यक्ष सुब्रमण्यम की मौजूदगी में 15 जनवरी को जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2013-14 से 2022-23 के बीच 24 करोड़ 82 लाख लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। बहुआयामी गरीबी साल 2013-14 में 29.17% थी, जिसमें 17.89% की गिरावट के साथ साल 2022-23 में 11.28% घटकर रह गई है। इनमें प्रभावशाली राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश है।
इन चार राज्यों में सबसे ज्यादा सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा गरीबी में 17.89% की रिकॉर्ड गिरावट आई है। पिछले नौ सालों में उत्तर प्रदेश से लगभग 5.94 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए है। वहीं बिहार में 3.77 करोड़, मध्यप्रदेश 2.30 करोड़ और राजस्थान में 1.87 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए है।
नीति आयोग इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 से 2019-21 के बीच 10.66 प्रतिशत की तेजी से लोग गरीबी से बाहर आए थे। वही साल 2005-06 से 2015-16 के बीच गरीबी से बाहर आने की दर 7.69% थी।
अब समझिए बहुआयामी गरीबी क्या है
बहुआयामी गरीबी में सिर्फ आर्थिक गरीबी ही नहीं आती है, इसमें जीवन जीने का स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य को आधार माना जाता है। ऐसे में इन व्यक्ति इन सभी पैमानों पर बेहतर पाया जाता है, तब वह बहुआयामी गरीबी से बाहर माना जाता है। बहुआयामी गरीबी को मापने के लिए 12 इंडिगेटर्स होते है। जैसे- शिशु मृत्यु दर, स्कूल में उपस्थिति, स्कूल जाने के वर्ष, माता का स्वास्थ्य, खाना पकाने की व्यवस्था, बिजली, मकान, संपत्ति और बैंक में खाते का होना शामिल हैं।
इन योजनाओं की बदौलत हासिल किया यह मुकाम
पिछले कुछ सालों में सरकार ने गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कई सारी योजनाएं चलाई है, जिसके चलते लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन खाते खुलवाए गए, कोरोना काल के दौरान 82 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन वितरित किया गया। साथ ही किसान सम्मान निधि, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शामिल हैं।
जुलाई 2023 में सयुंक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल ने वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक जारी किया था। इसमें विश्व के 110 देशों के 6.1 अरब लोगों में से 1.1 अरब लोग बहुआयामी रूप से अति गरीबी के रेखा के नीचे थे। इसमें भारत की 18.7% आबादी यानी 23 करोड़ लोग शामिल थे।
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