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MPI की Global ranking सुधारने में जुटा है भारत, 5 सालों के प्रयास का अगले साल से दिखेगा result

पीएमओ (PMO) ने कहा कि ज्‍यादा सुधार राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National Multidimensional Poverty Index) में तब दिखाई देगा जब इसका अगला संस्करण लाया जाएगा।

According to the PMO, these 5 years there was improvement in MPI at ground level
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New Delhi, First Published Nov 27, 2021, 3:28 PM IST
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बिजनेस डेस्‍क। भले ही ग्लोबल एमपीआई 2021 (Global MPI 2021) की रिपोर्ट में भारत की रैंक 109 देशों में 66वें स्थान पर हो, लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि वित्‍त वर्ष 2016 से लेकर 2020 के बीच सरकार की ओर से चलाई जा रही कल्‍याणकारी योजनाओं की वजह से भारत में जमीनी स्‍तर पर सुधार देखने को मिला है। आइए आपको भी बताते हैं क‍ि आख‍िर पीएमओ की ओर से किस तरह का बयान जारी किया गया है।

अगले एडिशन में और दिखेगा सुधार
पीएमओ ने शानिवार को बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5 2019-20) के पांचवें दौर के प्रारंभिक निष्कर्षों ने कल्याणकारी लक्ष्यों में सुधार का सुझाव दिया है, जो अभाव में कमी का दर्शाते हैं। पीएमओ ने अपने बयान में कहा कि जब राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) का अगला एडिशन आएगा तो उसमें सुधार भी दिखाई देगा। आधारभूत राष्ट्रीय एमपीआई पहले 2015-16 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के चौथे दौर के आधार पर तैयार किया गया था।

लगातार हो रहा है सुधार
पीएमओ ने कहा कि 24 नवंबर को जारी एनएफएचएस के आंकड़ें शुरुआती दौर में देखने पर काफी उत्साहजनक लग रहे हैं। पीएमओ के अनुसार रिपोर्ट में स्वच्छ खाना पकाने के फ्यूल, स्वच्छता और बिजली तक पहुंच में सुधार का सुझाव दिया गया है, जो अभाव में कमी को दर्शा रहा है। इसके अतिरिक्त, 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी राज्य की रिपोर्ट में स्कूल में उपस्थिति, पेयजल, बैंक खातों और आवास में कमी को कम करने का सुझाव दिया गया है। ये सुधार एनएफएचएस 5 (2019-20) घरेलू माइक्रो डाटा पर आधारित आगामी सूचकांक में बहुआयामी गरीबी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी की समग्र दिशा का संकेत देते हैं।

अगली रि‍पोर्ट का है इंतजार
पीएमओ ने कहा कि एनएफएचएस के चौथे राउंड के बाद से प्रमुख योजनाओं के माध्यम से मिले लाभ एनएफएचएस -5 फैक्टशीट और नेशनल एमपीआई आधार पर आने वाली रिपोर्ट में भी दिखाई देता है। पीएमओ ने कहा कि बेसलाइन नेशनल एमपीआई रिपोर्ट में 2015-16 और 2019-20 के बीच बहुआयामी गरीबी में कमी साफ देखने को मिलेगी। यह रिपोर्ट एनएफएचएस-5 के यूनिट स्तर के माइक्रो डाटा उपलब्ध होने के बाद जारी की जाएगी।

कई योजनाओं को कर दिया था रोलआउट
एनएफएचएस के चौथे राउंड के बाद आवास, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, खाना पकाने के फ्यूल, वित्तीय, स्कूल में उपस्थिति, पोषण, मां और बच्चे के स्वास्थ्य आदि में सुधार की दिशा में प्रमुख योजनाओं को शुरू कर दिया गया था। पीएमओ ने कहा कि इसलिए यह बेसलाइन पर स्थिति को मापने के लिए एक उपयोगी स्रोत के रूप में कार्य करता है यानी राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण योजनाओं के बड़े पैमाने पर रोलआउट से पहले। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), जल जीवन मिशन (जेजेएम), स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम), प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई), प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), पोशन अभियान और समग्र शिक्षा उनमें से कुछ योजनाएं और कार्यक्रम हैं।

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नीति आयोग है नोडल मंत्रालय
नीति आयोग बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के लिए नोडल मंत्रालय है। ग्लोबल एमपीआई 2021 के अनुसार भारत की रैंक 109 देशों में 66वें स्थान पर है। राष्ट्रीय एमपीआई परियोजना का उद्देश्य ग्‍लोबल एमपीआई का पुनर्निर्माण करना और व्यापक सुधार कार्य योजनाओं को तैयार करने के लिए विश्व स्तर पर गठबंधन और अभी तक अनुकूलित भारत एमपीआई बनाना है।

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