
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएस यात्रा (PM Modi US Visit) के दौरान भारत ने अमेरिका से 3 बिलियन डॉलर में 31 प्रीडेटर ड्रोन (MQ-9B Predator drones) खरीदने का सौदा किया है। इन ड्रोन के बिना हथियार वाले वर्जन का इस्तेमाल नौसेना द्वारा पहले से किया जा रहा है। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट से बातचीत में बताया है कि अमेरिका से खरीदे जाने वाले ड्रोन किस तरह जंग के वक्त सेना की ताकत बढ़ाएंगे और इनकी क्या खासियत है।
आर हरि कुमार ने कहा कि MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन लगातार 30 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सकते हैं। इसकी मदद से बहुत बड़े इलाके की निगरानी की जा सकती है। इस क्षमता से सैन्य बलों की ताकत बढ़ेगी। भारत द्वारा 31 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदे जाएंगे। इनमें से 15 सीगार्डियन ड्रोन होंगे। इनका इस्तेमाल नौसेना द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही वायु सेना और थल सेना के लिए आठ-आठ स्काईगार्डियन (MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन के लैंड वर्जन) खरीदे जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय ने कहा- एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन की कीमत की करेंगे जांच
हालांकि, भारत को अभी भी अमेरिका से 31 एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन की खरीद की लागत और शर्तों को अंतिम रूप देना बाकी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह डील फाइनल करने से पहले निर्माता द्वारा अन्य देशों को दी जाने वाली सबसे अच्छी कीमत की जांच करेगा।
प्रिडेटर ड्रोन से बढ़ी है भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता
एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि भारतीय नौसेना निगरानी के लिए इन ड्रोनों का इस्तेमाल कर रही है। ये हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन की श्रेणी में आते हैं। हमने देखा है कि इस ड्रोन की मदद से निगरानी क्षमता बढ़ी है। नवंबर 2020 से नेवी दो प्रिडेटर ड्रोन का इस्तेमाल लीज पर लेकर कर रही है। आर हरि कुमार ने कहा, "हमने 12,000 घंटे से अधिक समय तक ड्रोन को उड़ाया है। ये ड्रोन हमें विशाल क्षेत्रों पर प्रभावी ढंग से निगरानी बनाए रखने में सक्षम बनाते हैं।"
हिंद महासागर पर नजर रखने में काम आ रहे ड्रोन
दरअसल, हिंद महासागर में चीन की नौसेना की सक्रियता बढ़ी है। इसे देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार पूरे इलाके पर नजर रख रही है। इस काम के लिए ड्रोन और P8-I जैसे विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि शांति के समय में हम ड्रोन का इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोह लेने में करते हैं। लड़ाई की स्थिति में इसका इस्तेमाल टारगेट का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और यहां तक कि हमला करने में भी हो सकता है।
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