
नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे दुरुस्त होती जा रही हैं। इसके पीछे दुनियाभर की मदद की है। कोरोना के खिलाफ युद्ध में भारत के मित्र देश कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। रोज दुनियाभर से भारत को मदद पहुंच रही है। स्थानीयस्तर पर भी सरकारें, औद्योगिक घराने, भारत की तीनों सेनाएं, रेलवे और स्वयंसेवी संगठन अपनी-अपनी क्षमता के हिसाब से मदद कर रहे हैं। बता दें कि पिछले 24 घंटे में 3.26 लाख नए केस आए हैं। इनमें से 3876 लोगों की मौत हुई, जबकि इसी दौरान 3.52 लाख लोग ठीक भी हुए। देश मे इस समय 36.69 लाख एक्टिव केस हैं।
आइए जानते हैं विदेशों और स्थानीयस्तर पर मदद से कैसे बदल रहीं भारत की स्वास्थ्य सेवाएं
कर्नाटक: गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने शिगगांव में अपने आवासीय परिसर को 50 बिस्तरों वाले COVID देखभाल केंद्र में बदल दिया है।
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चमोली पहुंचकर जिला अस्पताल गोपेश्वर का निरीक्षण किया। उन्होंने 2 दिन के अंदर ऑक्सीजन प्लांट चालू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पीजी कॉलेज गोपेश्वर में स्थापित टीकाकरण केंद्र का भी निरीक्षण किया।
उत्तराखंड: स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया-आज हमें 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली है। 40 मीट्रिक टन ऑक्सीजन हमने कुमाऊं क्षेत्र के लिए भेजी है और 60 मीट्रिक टन ऑक्सीजन गढ़वाल क्षेत्र के लिए भेजी है। राज्य में रेमडेसिविर की भी स्थिति काफी स्थिर हो गई है।
दिल्ली: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया-15 दिनों में 1000 ICU बेड तैयार कर दिए हैं। यह दुनिया भर के लिए ये एक मिसाल है। हम आज से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बैंक शुरू कर रहे हैं। हमने दिल्ली के हर ज़िले में 200-200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का बैंक बनाया है। ऐसे मरीज़ जो होम आइसोलेशन में हैं अगर उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो हमारी टीम दो घंटे में उनके घर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पहुंचा देगी। अगर किसी व्यक्ति को कोरोना है, लेकिन वो किसी वजह से हमारे होम आइसोलेशन का हिस्सा नहीं है तो वो 1031 पर फोन कर होम आइसोलेशन का हिस्सा बन सकते हैं और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की मांग कर सकते हैं। हमारे डॉक्टर की टीम ये सुनिश्चित करेगी कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की जरूरत है या नहीं।
सिंगापुर: INS जलाश्व शनिवार को सिंगापुर पहुंच गया। यह वहां से ऑक्सीजन टैंक, सिलेंडर और अन्य मेडिकल इक्विपमेंट्स लेकर आएगा।
उत्तर प्रदेश: गोरखपुर के लिए पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस माहपुर स्टेशन से होकर रवाना हुई।
कजाकिस्तान: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया- यहां से 105 वेंटिलेटर, 750000 मॉस्क/श्वांसयंत्र और अन्य मेडिकल इक्विपमेंट्स लेकर एक विमान भारत पहुंचा।
विदेशों से ये सामग्री पहुंची: भारत 27 अप्रैल से विभिन्न देशों / संगठनों की ओर से अंतरराष्ट्रीय दान और सहायता के तौर पर कोविड-19 से जुड़ी चिकित्सा राहत सामग्रियां और उपकरण प्राप्त कर रही है। 27 अप्रैल से 13 मई तक 10,796 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 12,269 ऑक्सीजन सिलेंडर, 19 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, 6,497 वेंटिलेटर/बाई पैप, 4.2 लाख रेमडिसिविर की खुराकें सड़क एवं हवाई मार्ग के जरिए वितरित/भेजी जा चुकी हैं। इंडोनेशिया, लक्जमबर्ग, ओमान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, यूएसआईएसपीएफ, फिनलैंड और ग्रीस से 12/13 मई को ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर-1,506, ऑक्सीजन सिलेंडर-434 और 58 वेंटिलेटर/ बाईपैप /सीपैप मिले।
यूके: ब्रिटिश ऑक्सीजन कंपनी से प्राप्त 150 ऑक्सीजन सिलेंडरों को भारतीय वायु सेना ने पटना एयरपोर्ट पहुंचाया।
अमेरिका: देश के सभी राज्यों में आगे वितरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से रेमडिसिविर की 29,514 खुराक मुंबई एयरपोर्ट पर उतरीं।
ई-संजीवनी पोर्टल: आर्मी से रिटायर्ड और बुजुर्ग डॉक्टर्स ई-संजीवनी मंच पर निःशुल्क ऑनलाइन परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए आगे आए हैं। ई-संजीवनी ओपीडी भारत सरकार का प्रमुख टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म है। यह भारत के सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श की सुविधा प्रदान करता है एवं साथ ही दवाओं के ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन की व्यवस्था भी करता है। यह www.esanjeevaniopd.in पर उपलब्ध है।
भारत पेट्रोलियम: मुंबई और बीना स्थित रिफाइनरियों ने अपना प्रोडक्शन बढ़ाकर सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा केन्द्रों को प्रति माह 600 मीट्रिक टन मुफ्त गैसीय ऑक्सीजन दी जा रही है। वहीं, कोच्चि स्थित रिफाइनरी से हर महीने 100 मीट्रिक टन तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है। बीपीसीएल महाराष्ट्र में दो सरकारी अस्पतालों, केरल में तीन अस्पतालों और मध्य प्रदेश में पांच अस्पतालों में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित कर रहा है। इसके अतिरिक्त, रिफाइनरी में बॉटलिंग कंप्रेसर भी लगाया जा रहा है, जो सिलेंडर के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में मदद करेगा।
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